Rajasthan Panchayati Raj Rules 1996 in Hindi (Updated)
राज्य सरकार राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का राजस्थान अधिनियम सं. 13) की धारा 3(5), 7(छ), 8, 25(1), 31, 32(1), 33(ग), 35(1), 37(3), 38(1), 39(2), 44, 45(3), 53(1), 60, 65(1)(2), 67(2), 68(2), 69, 74(1)(4), 75(1)(2)(3), 77, 78(1)(2), 79(2), 80(1)(3), 81(1), 82(1), 84(1), 89(4)(8), 90(2)ण् 91(1), 121 (3(5),122 के साथ पठित धारा 102 प्रदत्त शक्तियों और इस निमित्त उसे समर्थ बनाने वाली समस्त अन्य शक्तियों का प्रयोग करते हुए, इसके द्वारा निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ - (1) इन नियमों का नाम राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 है । ये राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होंगे।
2. निर्वचन - (1) इन नियमों में, जब तक कि विषय या संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(I) ‘‘अधिनियम‘‘ से राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का राजस्थान अधिनियम सं. 13) अभिप्रेत है,
(II) ‘‘महालेखाकार‘‘ से महालेखाकार, राजस्थान अभिप्रेत है,
(IIक) ‘‘प्राधिकृत अधिकरण‘‘ से प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय अध्यापक के पद के चयन के लिए, राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर प्राधिकृत अभिकरण अभिप्रेत है;
(III) ‘‘पूर्ण दिन‘‘ के अन्तर्गत रविवार और अवकाश सम्मिलित हैं किन्तु बैठक का दिन और नोटिस की प्राप्ति का दिन उसके अन्तर्गत नहीं है,
(IV) ‘‘दिन‘‘ के मध्यरात्रि को शुरू होने वाला और समाप्त होने वाला कलैण्डर दिन अभिप्रेत है किन्तु मुख्यालय से ऐसी अनुपस्थिति को, जो 24 घण्टों से अधिक नहीं है, एक दिन गिना जायेगा चाहे अनुपस्थिति किसी भी समय शुरू या समाप्त होती हो,
(V) ‘‘विकास आयुक्त‘‘ से राज्य सरकार द्वारा उस पदाभिधान से नियुक्त अधिकारी अभिप्रेत है,
(VI) ‘‘निदेशक , स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग‘‘ से राज्य सरकार द्वारा उस पदाभिधान से नियुक्त अधिकारी अभिप्रेत है,
(VII) ‘‘प्रपत्र‘‘ से इन नियमों से संलग्न प्रपत्र अभिप्रेत है,
(VIII) ‘‘कार्यालय प्रधान‘‘ से किसी पंचायत के मामले में सरपंच, किसी पंचायत समिति के मामले में विकास अधिकारी और किसी जिला परिषद् के मामले में मुख्य कार्यपालक अधिकारी अभिप्रेत है,
(IX) ‘‘भू-राजस्व‘‘ से भूमि या भूमि में किसी भी हित या भूमि के उपयोग के संबंध में किसी भी प्रकार से किसी भी मद्धे राज्य सरकार को प्रत्यक्षः संदेय वार्षिक मांग अभिप्रेत है और समनुदेशित भू-राजस्व उसके अन्तर्गत है,
(X) ‘‘बैठक‘‘ से संबंधित पंचायती राज संस्था या उसकी स्थायी समिति, यदि कोई हो, की बैठक अभिप्रेत है,
(XI) ‘‘सदस्य‘‘ से किसी पंचायती राज संस्था का कोई सदस्य अभिप्रेत है और कोई सरपंच उसके अन्तर्गत है,
(XII) ‘‘प्रस्ताव‘‘ से पंचायती राज संस्था या उसकी स्थायी समिति, यदि कोई हो, की बैठक में विचार के लिए किसी सदस्य द्वारा किया गया कोई प्रस्ताव अभिप्रेत है,
(XIII) ‘‘पंचायत‘‘, ‘‘पंचायत समिति‘‘ और ‘‘जिला परिषद्‘‘ से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए इस अधिनियम के अधीन, क्रमश: किसी गांव, किसी खण्ड और जिले के स्तर पर स्थापित स्वायत्त शासन की संस्थाए अभिप्रेत है,
(XIV) ‘‘पंचायत निधि‘‘ से प्रत्येक पंचायती राज संस्था के लिए अधिनियम की धारा 64 के अधीन उसके नाम से गठित निधि अभिप्रेत हैं,
(XV) पटवारी से उस पदाभिधान से नियुक्त कोई पदधारी अभिप्रेत है,
(XVI) ‘‘अनुसूची‘‘ से इन नियमों से संलग्न कोई अनुसूची अभिप्रेत है,
(XVII) ‘‘सचिव‘‘, ‘‘विकास अधिकारी‘‘ या ‘‘मुख्य कार्यपालक अधिकारी‘‘ से क्रमश: किसी पंचायत, पंचायत समिति या, यथास्थिति, जिला परिषद् के लिए राज्य सरकार द्वारा या ऐसे प्राधिकारी द्वारा, जिसे इन निमित्त सरकार द्वारा प्राधिकृत किया जाये, ऐसे पदाभिधान से नियुक्त अधिकारी अभिप्रेत है,
(XVIII) ‘‘धारा‘‘ से अधिनियम की कोई धारा अभिप्रेत है,
(XIX) ‘‘तहसीलदार‘‘ से राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 (1956 का अधिनियम सं. 15) के उपबंधों के अधीन उस पदाभिधान से नियुक्त अधिकारी अभिप्रेत है,
(XX) ‘‘कोषागार‘‘ के अन्तर्गत उप कोषागार होगा और जहां कोई पंचायत अपनी निधियां किसी डाकघर या किसी राष्ट्रीयकृत बैंक/अनुसूचित बैंक/ग्रामीण विकास बैंक की किसी शाखा में रखे वहॉं उसके अन्तर्गत ऐसा डाकघर या बैंक की शाखा भी होगी,
(XXI) ‘‘वर्ष‘‘ से 1 अप्रेल से शुरू होने वाला और अगली 31 मार्च को समाप्त होने वाला वित्तीय वर्ष अभिप्रेत है।
(2) इन नियमों में प्रयुक्त किये गये किन्तु परिभाषित नहीं किये गये समस्त शब्दों और अभिव्यक्तियों का वही अर्थ हैं जो अधिनियम में क्रमशः उन्हें दिये गये हैं।
ग्राम सभा और सतर्कता समिति
3. ग्राम सभा और उसकी बैठकें - किसी पंचायत का सरपंच या उसकी अनुपस्थिति में उप सरपंच अधिनियम की धारा 7 में वर्णित कृत्यों का पालन करने के लिए प्रति वर्ष कम से कम दो ग्राम सभाएं बुलायेगा।
4. बैठक का स्थान - (I) ग्राम सभा की बैठक उस गांव में होगी जिसमें पंचायत का कार्यालय स्थित है। वह गांव में पंचायत भवन या किसी अन्य सुविधाजनक सार्वजनिक स्थान पर होगी। यह किसी भी प्राइवेट मकान या स्थान पर नहीं होगी।
(II) ऐसे मामले में, जिसमें पंचायत सर्किल के किसी भी अन्य गांव की जनसंख्या 1000 से अधिक है, सरपंच या उसकी अनुपस्थिति में उप सरपंच दो या अधिक समूहों में ग्राम सभा बुला सकेगा। ऐसी ग्राम सभा अधिनियम की धारा 7 के अनुसार पंचायत मुख्यालय पर आयोजित ग्राम सभा के अतिरिक्त हो सकेगी, किन्तु पंचायत मुख्यालय पर ग्राम सभा में किये गये विनिश्चयों के उल्लंघन में कोई विनिश्चय कार्यान्वित नहीं किया जायेगा।
5. बैठक के नोटिस का प्रकाशन - (1) ग्राम सभा की बैठक की तारीख और समय का नोटिस, उसमें संव्यवहार किये जाने वाले कारबार का विवरण देते हुए बैठक के दिन से कम से कम 15 दिन पूर्व, -
(I) पंचायत सर्किल के प्रत्येक गांव में एक या अधिक सहजदृश्य स्थान पर उसे चस्पा करके,
(II) पंचायत सर्किल के प्रत्येक गांव में डोंडी पिटवाकर या किसी ध्वनि विस्तारक यंत्र से ऐसी बैठक की घोषणा करके, प्रकाशित किया जायेगा:
परन्तु विशेष या आपात बैठकों या विशेष प्रयोजनों के लिए साधारण बैठकें लघुतर कालावधि का नोटिस देकर बुलायी जा सकेंगी किन्तु किसी भी दशा में ऐसी कालावधि 3 दिन से कम की नहीं होगी।
(2) नोटिस की एक-एक प्रति विधान सभा सदस्य, प्रधान और पंचायत समिति, और जिला परिषद् के निर्वाचित सदस्य के साथ-साथ विकास अधिकारी को भी भेजी जायेगी।
(3) पंचायत समिति संबंधित ग्राम सभा बैठक के लिए विहित कालावधि के कम से कम एक मास पूर्व ऐसी बैठकें आयोजित करने के लिए सुविधाजनक तारीखों का सुझाव अग्रिम तौर पर दे सकेगी जिससे ग्राम सभा में प्रसार अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके। तद्नुसार सरपंच या उसकी अनुपस्थिति में उप सरपंच सामान्यतः ग्राम सभा बैठक का नोटिस जारी करेगा।
(4) ग्राम सभा का नोटिस तहसील स्तर के समस्त कृत्यकारियों जैसे तहसीलदार, चिकित्सा प्रभारी, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सहायक अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, सहायक अभियंता, राज्य विद्युत बोर्ड, सहायक अभियंता, सिंचाई, पशु चिकित्सालय इत्यादि को भी उन्हें उसमें भाग लेने का अनुरोध करते हुए भेजा जायेगा।
(5) विकास अधिकारी एक प्रसार अधिकारी को प्रतिनियुक्त करेगा जो ऐसी बैठक के लिए नियत तारीख से एक दिन पूर्व पंचायत मुख्यालय पहुंचेगा। वह यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसी बैठक के लिए समुचित प्रचार किया गया है और वयस्क निवासियों के दशांश की विहित गणपूर्ति उपस्थित है। तद्नुसार सरपंच या उसकी अनुपस्थिति में उप सरपंच प्रचार के लिए सम्यक इंतजाम करेगा।
6. गणपूर्ति के अभाव में स्थगन - (I) यदि अपेक्षित गणपूर्ति नहीं होती है और बैठक गणपूर्ति के अभाव में स्थगित की जाती है तो वह किसी भी दशा में उसी तारीख को आयेाजित नहीं होगी। जब ग्राम सभा की स्थगित बैठक नियत की जाये, तब तक कम से कम एक सप्ताह की कालावधि बीत जानी चाहिए।
(II) ऊपर नियम 5 में यथा-उपबंधित समुचित प्रचार लोगों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पुनः किया जायेगा।
7. ग्राम सभा बैठकों के लिए कार्यसूची - वित्तीय वर्ष के प्रथम त्रिमास अर्थात् अप्रेल से जून में आयोजित की जाने वाली ग्राम सभा बैठक के लिए धारा 3 की उप-धारा (3) और वित्तीय वर्ष के अंतिम त्रिमास अर्थात् जनवरी से मार्च में आयोजित की जाने वाली ग्राम सभा बैठक के लिए धारा 3 की उप-धारा (4) में वर्णित मदों के सिवाय नीचे वर्णित मदें भी ग्राम सभा बैठकों की कार्यसूची में सम्मिलित की जायेगी -
(I) गत ग्राम सभा बैठक का अनुपालन,
(II) मृत कृषकों के नामांतरणों का अनुप्रमाणन,
(III) आवास स्थलों के आवंटन के लिए परिवारों की पहचान,
(IV) एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत ऋण और सहायता के लिए गरीबी रेखा के नीचे के परिवार,
(V) विकास संकर्मो की प्राप्तियां, व्यय और भौतिक प्रगति,
(VI) आगामी वर्ष में प्रस्तावित योजना संकर्मो की प्राथमिकताओं का नियतन,
(VII) ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम, पेयजल और जल-निकास,
(VIII) स्वास्थ्य कार्यक्रम- टीकाकरण और परिवार कल्याण,
(IX) स्वयं की आय बढाने की रीतियां,
(X) आबादी भूमि और चरागाह का विकास,
(XI) संपरीक्षा (आडिट) की आपत्तियां और उनका उत्तर,
(XII) सतर्कता समिति की रिपोर्ट पर टिप्पणियां,
(XIII) सतर्कता समिति का पुनर्गठन (केवल प्रथम त्रिमास बैठक)
8. कार्यवाहियों का अभिलेखन - (1) विकास अधिकारी या उसकी ओर से ग्राम सभा में उपस्थित होने वाले प्रसार अधिकारी का कर्त्तव्य यह सुनिश्चित करने का होगा कि सचिव बैठक की कार्यवाहियां उसी तारीख को सही-सही तौर पर अभिलिखित करता है।
(2) वह यह भी सुनिश्चित करेगा कि अधिनियम की धारा 8 और उपर्युक्त नियम 7 में विहित समस्त मदों पर ग्राम सभा में पूर्ण रूप से चर्चा की जाती है और तद्नुसार कार्यवाहियां अभिलिखित की जाती हैं। विकास अधिकारी या बैठक में उपस्थित होने वाला प्रसार अधिकारी प्रस्थान से पूर्व कार्यवाहियों पर हस्ताक्षर करेगा।
(3) ऐसी कार्यवाहियों की प्रतियां 15 दिन के भीतर-भीतर पंचायत समिति को अग्रेषित की जायेंगी और यदि ऐसी बैठक जिला परिषद् या राज्य सरकार की अपेक्षा से आयोजित की जाये तो एक प्रति ऐसे अधिकारी को भी भेजी जायेगी।
9. विनिश्चयों का अनुपालन - (1ं) पंचायत के साथ-साथ पंचायत समिति का ग्राम सभा बैठकों में लिये गये विनिश्चयों के अनुपालन को सुनिश्चित करने का कर्तव्य होगा।
(2) अनुपालन रिपोर्ट आगामी ग्राम सभा बैठक के समक्ष रखी जायेगी।
(3) संबंधित पंचायत समिति का विकास अधिकारी महत्वपूर्ण विनिश्चयों को उल्लेखित करते हुए पंचायतवार नियंत्रण रजिस्टर भी रखेगा।
(4) पंचायत प्रसार अधिकारी और विकास अधिकारी पंचायतों के अपने निरीक्षण के दौरान, ऐसे अनुपालन की प्रगति का पुनर्विलोकन करेगा।
10. ग्राम सभा बैठकों को मॉनीटर करना - (1) प्रतिवर्ष अप्रेल और जनवरी मास के दौरान विकास अधिकारी पंचायत समिति की बैठकों में ग्राम सभा बैठकों की प्रगति रखेगा। वह ऐसी रिपोर्ट आगे आवश्यक कार्यवाही करने के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी को भी अग्रेषित करेगा।
(2) धारा 3 में यथा-उल्लिखित ग्राम सभा की विहित बैठक आयोजित करने में किसी भी सरपंच, यथास्थिति, उप सरपंच के विफल होने की दशा में पंचायत समिति मामले की रिपोर्ट अधिनियम की धारा 38 के अधीन कार्यवाही के लिए राज्य सरकार को करेगी।
11. सतर्कता समितियों को बनाया जाना - (1) सरपंच कार्यसूची में एक मद वित्तीय वर्ष के प्रथम त्रिमास में आयोजित होने वाली ग्राम सभा बैठक में सतर्कता समिति/समितियों गठन के लिए रखेगा।
(2) सतर्कता समिति पंचायत के साथ निकट समन्वय रखते हुए कार्य करेगी।
(3) पंचायत का सचिव सतर्कता समिति बैठकों के लिए सचिव के रूप में भी कार्य करेगा और उसकी कार्यवाहियां अभिलिखित करेगा।
( टिप्पणी - दिनांक 6.1.2000 से संशोधन कर पंचायत स्तर की सतर्कता समिति समाप्त कर दी गई है। धारा 56 में संशोधन कर पंचायत समिति एवं ज़िला परिषद स्तर की सतर्कता समितियां गठित कर दी गई है। )
12. सदस्यता - (1) सतर्कता समिति में ऐसे सात सदस्य होंगे जो मान्यता प्राप्त समुदाय के नेता हों और साधारणतः निर्वाचन में भाग नहीं लेते हों।
(2) ऐसे पंचायत क्षेत्र में निवास करने वाला पंचायत समिति या जिला परिषद् का सदस्य भी ग्राम सभा के अनुमोदन से ऐसी सतर्कता समिति में सदस्य हो सकेगा।
(3) सदस्य विकास संकर्मो, आबादी, भूमि, चरागाह पर अतिचार, स्वच्छता और पेयजल इत्यादि के पर्यवेक्षण के लिए समूह बनाने का विनिश्चय कर सकेंगे।
(4) सदस्य बैठकें आयोजित करने की तारीखें विनिश्चित करने के लिए और बैठकों की अध्यक्षता के लिए एक व्यक्ति को अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित करेंगे।
13. सतर्कता समिति की भूमिका - (1) सतर्कता समिति की भूमिका केवल त्रुटियां खोजना और पंचायत की आलोचना करना नहीं है।
(2) इसकी भूमिका यद्यपि पर्यवेक्षी है फिर भी वह रचनात्मक, सहयोगी और सलाहकारी होगी। मुख्य उद्देश्य विकास क्रिया-कलापों का त्वरित कार्यान्वयन, संकर्मो की गुणवत्ता (क्वालिटी) बनाये रखना, निधियों का दुरुपयोग रोकना और जनता से प्राप्त शिकायतों का वस्तुनिष्ठ आंकलन है।
14. बैठकें - (1) सतर्कता समिति की प्रथम बैठक समिति के गठन के ठीक पश्चात्, सचिव द्वारा सदस्यों के लिए सुविधाजनक, किसी तारीख को नियत की जायेगी।
(2) बैठक के लिए पश्चात्वर्ती तारीखें सतर्कता समिति के अध्यक्ष द्वारा नियत की जायेंगी। बैठक का नोटिस सचिव द्वारा तामील करवाया जायेगा।
(3) सर्तकता समिति एक मास में कम से कम एक बार बैठक करेगी।
(4) पंचायत का सचिव समस्त ऐसी बैठकों में सदैव उपस्थित होगा।
15. कार्यसूची की मदें - सतर्कता समिति निम्नलिखित मदों का पुनर्विलोकन करेगी-
(I) जनता से विनिर्दिष्ट बिंदुओं पर शिकायतें,
(II) निष्पादनाधीन सन्निर्माण संकर्मो की गुणवत्ता (क्वालिटी),
(III) पंचायत निधि का उपयोग,
(IV) आबादी भूमि और चरागाह पर अतिचार,
(V) संकर्मो के लिए मंजूरी और व्यय उपदर्शित करने वाला सूचना-पट्ट,
(VI) अन्य सुसंगत विषय जैसे स्वच्छता, जल-निकास, पेयजल, स्वास्थ्य, टीकाकरण इत्यादि।
16.सतर्कता समिति की रिपोर्ट ग्राम सभा की कार्यवाहियों का एक भाग होना - सतर्कता समिति की रिपोर्ट पर ग्राम सभा में चर्चा कराना सरपंच या उसकी अनुपस्थिति में उप सरपंच का कर्तव्य होगा। वह ग्राम सभा की कार्यवाहियों का एक भाग होंगी।
17. सरपंच/पंचों की टिप्पणियां - सरपंच/उप सरपंच या पंच या, यथास्थिति, सचिव अपनी टिप्पणियां ग्राम सभा के लिए रखेगा। ऐसी टिप्पणियां ग्राम सभा की कार्यवाहियों में सम्मिलित की जायेंगी।
18. सतर्कता समिति का पुनर्गठन - ग्राम सभा उसी समिति को बनाये रख सकेगी या वित्तीय वर्ष के प्रथम त्रिमास में होने वाली अपनी बैठक में प्रतिवर्ष उसे पुनर्गठित कर सकेगी।
अध्याय 3
19. कार्यभार का अंतरण - (1) जब अधिनियम की धारा 25 (1) के अधीन कार्यभार सौंपा जाना अपेक्षित हो तब ऐसा सदस्य, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष, वस्तुतः अपने भौतिक कब्जे के अधीन रजिस्टरों और वस्तुओं की सूची तैयार करवायेगा और उन्हें धारा 25 (1) में उल्लिखित व्यक्ति को सौंप देगा। पंचायत के मामले में सरपंच पंचायत की बैठकों की कार्यवृत्त पुस्तक अपने उत्तरवर्ती को सौंप देगा और यह भी सत्यापित करेगा कि रोकड बही, पास-बुक, चैक बुक, नगद अतिशेष, पट्टा रजिस्टर, ग्राम सभा बैठक रजिस्टर पंचायत कार्यालय में उपलब्ध है। यद्यपि समस्त ऐसे अभिलेख धारा 78 (2) के अनुसार सचिव की अभिरक्षा में रहते हैं किन्तु सरपंच भी ऐसे अभिलेख की सुरक्षित अभिरक्षा के लिए उत्तरदायी है।
(2) कार्यभार सौंपने वाले और लेने वाले दोनों ही व्यक्ति कार्यभार के अंतरण के प्रमाणस्वरूप ऐसी सूची के नीचे अपने-अपने हस्ताक्षर करेंगे और तारीख लगायेंगे।
(3) कार्यभार सूची चार प्रतियों में तैयार की जायेगी। एक प्रति पंचायत समिति को भेजी जायेगी, एक कार्यालय प्रति के रूप में प्रतिधारित की जानी है और दो सौंपने वाले और लेने वाले व्यक्तियों को दी जायेगी।
20. कार्यभार सौंपने में विफल होने की दशा में मुख्य कार्यपालक अधिकारी की सहायता का लिया जाना - धारा 25 (1) के अधीन किसी भी व्यक्ति के कार्यभार सौंपने में विफल होने पर अधिनियम की धारा 88(2) के अधीन कार्यवाही करने के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी को लिखित निवेदन किया जा सकेगा और मुख्य कार्यपालक अधिकारी नव निर्वाचित व्यक्ति को कार्यभार दिलवायेगा।
21. अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस - (1) धारा 37 के अधीन किसी पंचायती राज संस्था के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष में विश्वास का अभाव अभिव्यक्त करने वाला प्रस्ताव करने के आशय का लिखित नोटिस प्रपत्र 1 में होगा और *सक्षम प्राधिकारी को परिदत्त किया जायेगा।
(2) बैठक और उसके लिए नियत तारीख और समय का नोटिस सक्षम प्राधिकारी द्वारा बैठक की तारीख से कम से कम 15 पूर्ण दिन पूर्व डाक में डाले जाने के प्रमाण-पत्र के अधीन डाक से, प्रत्यक्षतः निर्वाचित प्रत्येक पंच/सदस्य को उसके सामान्य निवास स्थान पर प्रपत्र 2 में भेजा जायेगा। ऐसे नोटिस की प्रति ऐसी पंचायती राज संस्था के सूचना-पट्ट पर भी लगायी जायेगी:
परन्तु ऐसे किसी स्थान की दशा में जहां कोई डाकघर नहीं हो या जहां नोटिस की तामील शीघ्रता से नहीं की जा सकती हो ऐसा नोटिस संबंधित तहसीलदार के माध्यम से तामील किया जायेगा।
22. जाँच की प्रक्रिया - (1) धारा 38 की उप-धारा (1) के अधीन कोई भी कार्यवाही करने के पूर्व राज्य सरकार स्वप्रेरणा से या किसी भी शिकायत पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी से प्रारम्भिक जाँंच करवा सकेगी और उससे राज्य सरकार को एक मास के भीतर-भीतर रिपोर्ट भेजने की अपेक्षा कर सकेगी।
(2) यदि, पूर्वोक्तानुसार प्राप्त रिपोर्ट पर विचार करने के पश्चात या अन्यथा राज्य सरकार की यह राय हो कि धारा 38 की उप-धारा (1) के अधीन कार्यवाही आवश्यक है तो राज्य सरकार निश्चित आरोप विरचित करेगी और उनकी संसूचना ऐसे ब्यौरों के साथ जो आवश्यक समझे जायें, पंचायती राज संस्था के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य को लिखित में देगी। उससे एक मास के भीतर-भीतर अभिकथनों को स्वीकार करते हुए प्रतिवाद, यदि कोई हो, करके इन्कार करते हुए एक लिखित कथन प्रस्तुत करने की और यदि वह चाहे तो व्यक्तिशः सुने जाने की अपेक्षा की जायेगी।
(3) राज्य सरकार विहित कालावधि की समाप्ति और ऐसे लिखित कथन पर विचार करने के पश्चात अधिकारी नियुक्त कर सकेगी और राज्य सरकार की ओर से जाँच अधिकारी के समक्ष मामला प्रस्तुत करने के लिए किसी व्यक्ति को नामनिर्दिष्ट भी कर सकेगी।
(4) जाँच अधिकारी ऐसे दस्तावेजी साक्ष्य पर विचार करेगा और ऐसा मौखिक साक्ष्य लेगा जो आरोपों के संबंध में सुसंगत या तात्विक हो। साक्षियों की प्रतिपरीक्षा (जिरह) का अवसर विरोधी पक्ष को दिया जायेगा।
(5) जाँच अधिकारी जाँंच की समाप्ति पर साबित या असाबित या अंशतः साबित के रूप में प्रत्येक आरोप पर कारणों सहित अपने निष्कर्ष अभिलिखित करते हुए रिपोर्ट तैयार करेगा और उसे अंतिम विनिश्चय के लिए राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा।
(6) राजस्थान अनुशासनिक कार्यवाही (साक्षियों को समन किया जानाए दस्तावेजों का पेश किया जाना) अधिनियम, 1959 (1959 का अधिनियम, सं. 28) के उपबंध और तद्धीन बनाये गये नियम इन नियमों के अधीन पंचायती राज संस्था के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या, यथास्थिति, सदस्य के विरूद्ध की जाने वाली जाँच पर यथावश्यक परिवर्तनों सहित लागू होंगे।
(7) राज्य सरकार जाँच अधिकारी के निष्कर्षो पर विचार करेगी और उसे सुने जाने का अवसर देने के पश्चात ऐसे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य को या तो माफ कर सकेगी या पद से हटा सकेगी या समुचित आदेश पारित कर सकेगी। हटाये जाने की दशा में, वह राजपत्र में भी प्रकाशित किया जायेगा: परन्तु यदि ऐसी पंचायती राज संस्था के निर्वाचन की अवधि पहले ही समाप्त हो गयी हो तो उनके विरुद्ध निष्कर्ष अभिलिखित किये जायेंगे।
23. निरर्हता की दशा में हटाये जाने के लिए प्रक्रिया - (1) जब कभी पंच/सरपंच के मामले में मुख्य कार्यपालक अधिकारी को और प्रधान/उप-प्रधान, प्रमुख/ उप प्रमुख या किसी पंचायती राज संस्था के सदस्य के मामले में, जिसे इस रूप में सम्यक् रूप में निर्वाचित घोषित किया गया है या जिसे अधिनियम के किसी भी उपबंध के अधीन इस रूप में नियुक्त किया गया है, राज्य सरकार को यह अभ्यावेदन किया जाये या अन्यथा उसके नोटिस में यह लाया जाये कि वह उस समय जब वह इस प्रकार निर्वाचित या नियुक्त किया गया था, ऐसे निर्वाचन या नियुक्ति के लिए अर्हित नहीं था या निरर्हित था या तत्पश्चात ऐसे सदस्य के रूप में बने रहने के लिए निरर्हित हो गया है तब सक्षम प्राधिकारी उसे किये गये अभ्यावेदन या अन्यथा उसके नोटिस में लाये गये विषय की भागरूप अभिकथित निरर्हता या निरर्हताओं को स्पष्टतः और लेखबद्ध करेगा और ऐसे सदस्य को तत्काल नोटिस जारी करेगा और -
(I) उसके विरुद्ध अभिकथनों का सार तैयार करेगा,
(II) नोटिस के जारी होने की तारीख के कम से कम पन्द्रह दिन पश्चात की कोई तारीख नियत करेगा जिसकी जाँच की जायेगी,
(III) उससे स्वीय उपस्थिति के द्वारा या लिखित में यह कारण (हेतुक) दर्शित करने की अपेक्षा करेगा कि उसके अर्हित नहीं होने या निरर्हित होने के अभिकथित आधार पर उसका स्थान राज्य सरकार द्वारा रिक्त या रिक्त हुआ घोषित क्यों नहीं किया जाना चाहिए,
(IV) उससे अभिकथन का प्रत्याख्यान करने में ऐसा दस्तावेजी या अन्य साक्ष्य जो उसके कब्जे में हो, पेश करने की अपेक्षा करेगा, और
(V) यदि वह ऐसी वांछा करे तो उसे नोटिस द्वारा नियत तारीख को वैयक्तिक रूप से उपस्थित होने के लिए कहेगा और नोटिस की प्रति इत्तिला देने वाले, यदि कोई हो, को भी भेजी जायेगी।
(2) नोटिस द्वारा नियत तारीख को मुख्य कार्यपालक अधिकारी या, यथास्थिति, राज्य सरकार, इत्तिला देने वाले, यदि कोई हो, के साथ-साथ अपचारी सदस्य, यदि वह उसके समक्ष उपसंजात हो और वैयक्तिक सुनवाई के लिए निवेदन करे, को सुनेगी, अभिकथन या अभिकथनों को साबित या नासाबित करने में उनके द्वारा पेश किये गये दस्तावेज और अन्य साक्ष्य पर विचार करेगी, ऐसी और जाँंच करेगी जो वह आवश्यक समझे, अभिकथित निरर्हता या निरर्हताओं के बारे में निष्कर्ष अभिलिखित करेगी और या तो कार्यवाहियों को समाप्त करने का आदेश करेगी या ऐसे सदस्य के स्थान को रिक्त हुआ घोषित करेगी या ऐसा अन्य आदेश करेगी जो अधिनियम की धारा 39 के अधीन मामले की परिस्थितियों में उचित हो।
24. बैठकों से अनुपस्थित रहने के कारण रिक्ति - (1) यदि कोई सदस्य पंचायती राज संस्था की तीन क्रमवर्ती बैठकों से अनुपस्थित रहा है तो मामला पंचायती राज संस्था के समक्ष रखा जायेगा और ऐसी पंचायती राज संस्था, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि वह सदस्य लिखित में सूचना दिये बिना तीन क्रमवर्ती बैठको से अनुपस्थित रहता है, इस आशय का कोई संकल्प पारित करेगी कि अनुपस्थित सदस्य तीन क्रमवर्ती बैठकों में अनुपस्थित रहा है और बैठक के अभिलेख और ऐसे किन्हीं भी अन्य कागजों, जो सुसंगत हो, के साथ संकल्प की एक प्रति पंच/सरपंच के मामले में मुख्य कार्यपालक अधिकारी को और अन्यों के मामले में राज्य सरकार को अपनी सिफारिश सहित अग्रेषित करेगी।
(2) खण्ड (1) में निर्दिष्ट अभिलेख की प्राप्ति पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी या, यथास्थिति, राज्य सरकार अभिलेख का परिशीलन करने और पंचायती राज संस्था की सिफारिश पर विचार करने पर तथा ऐसी और जाँंच करने के पश्चात जो वह आवश्यक समझे और अनुपस्थित सदस्य को सुने जाने का अवसर देने के पश्चात ऐसे स्थान को रिक्त हुआ घोषित कर सकेगी।
(3) अंतिम आदेशों की प्रतियां संबंधित जिला परिषद् और पंचायती राज संस्था को भेजी जायेंगी।
(4) राज्य सरकार मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा पारित किसी आदेश की सत्यता, वैधता और औचित्य के बारे में स्वयं का समाधन करने के प्रयोजन के लिए संबंधित अभिलेख की परीक्षा कर सकेगी और ऐसे आदेश को पुष्ट, फेरफारित या विखण्डित कर सकेगी।
25. शपथ न लेने के कारण स्थान की रिक्ति - (1) यदि किसी पंचायती राज संस्था के किसी सदस्य के बारे में पंच सरपंच के मामले में मुख्य कार्यपालक अधिकारी और अन्य मामलों में राज्य सरकार यह पाये कि ऐसे सदस्य ने धारा 23 के अधीन अधिसूचना की तारीख से तीन मास के भीतर-भीतर विहित शपथ नहीं ली या प्रतिज्ञान नहीं किया है तो वह राजस्थान पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 76 के उप-नियम (2) में उल्लेखित संबंधित अधिकारियों से मामले की आवश्यक सूचना इस प्रकार मंगायेगा कि उसकी अध्यापेक्षा की तारीख के एक पखवाडे के भीतर-भीतर वह उसके पास पहुँच जाये।
(2) यदि ऐसी सूचना से यह पाया जाये कि ऐसे सदस्य ने उस समय तक अपेक्षित शपथ नहीं ली है या प्रतिज्ञान नहीं किया है तो पंच सरपंच के मामले में मुख्य कार्यपालक अधिकारी और प्रधान/उप प्रधान, प्रमुख/उप प्रमुख या सदस्य के मामले में राज्य सरकार ऐसी और जाँंच के पश्चात, जो वह आवश्यक समझे और संबंधित सदस्य को सुने जाने का अवसर देने के पश्चात ऐसे स्थान को रिक्त घोषित कर सकेगी या ऐसा अन्य आदेश कर सकेगी, जो वह मामले की परिस्थितियों में उचित समझे।
26. स्थानों या पदों की रिक्ति का प्रकाशित किया जाना - अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य, जिसका स्थान अधिनियम की धारा 39 या 41 के अधीन रिक्त हो गया है, का नाम और पदाभिधान मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा अपनी ओर से या, यथास्थिति, राज्य सरकार की ओर से संबंधित पंचायती राज संस्था के सूचना-पट्ट पर प्रकाशित किया जायेगा। उसकी रिपोर्ट राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयेाग को भी की जायेगी।
अध्याय 4
27. सदस्यों इत्यादि को भत्तों का संदाय - समस्त भत्ते संबंधित पंचायती राज संस्था की निजी आय में से संदत्त किये जायेंगे।
28. भत्तों की दरें - पंचायती राज संस्था के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को सम्मिलित करते हुए ऐसी संस्था के सदस्य को मानदेय और बैठक भत्ता ऐसी दरों पर देय होगा जो सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित की जाये।
मानदेय दरें
राजस्थान पंचायतीराज नियम 1996 के नियम 27 से 30 के अनुसार प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पूर्व में जारी अधिसूचना क्रमांकः एफ.951 (19) (41) परावि/ लेखा/ नि.आ./ जिला परिषद/ सुविधा/ 7204 दिनांक 11.10.2017 द्वारा पंचायतीराज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को देय-मानदेय एवं पूर्व में जारी अधिसूचना क्रमांकः एफ.951 (19) (41) परावि/ लेखा/ नि.आ./ बजट घोषणा / 2012-13/ 2494 दिनांक 01.04.2013 द्वारा पंचायतीराज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को देय-मानदेय की दरों में माननीय मुख्यमंत्री की बजट घोषणा वर्ष 2022-23 के अनुसार निम्न संशोधन किया जाता है-
मानदेय दरें
जन प्रतिनिधि
का पद नाम वर्तमान में देय मानदेय दर रू. प्रतिमाह संशोधित मानदेय दर रू. प्रतिमाह
1 2 3
जिला प्रमुख, जिला परिषद 10000 12000
प्रधान, पंचायत समिति 7000 8400
सरपंच, ग्राम पंचायत 4000 4800
बैठकों भत्तों कीे दरें‘‘
जनप्रतिनिधि का पद नाम वर्तमान देय राशि संशोधित बैठक भत्ता की दर रू. प्रतिमाह
1 2 3
सदस्य, जिला परिषद 500 600
सदस्य, पंचायत समिति 350 420
सदस्य, ग्राम पंचायत 200 240
जनप्रतिनिधियों को देय मानदय एवं बैठक भत्तों का भुगतान राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाले राशि से किया जायेगा
29. दैनिक भत्ता - किसी पंचायती राज संस्था के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को सम्मिलित करते हुए ऐसी संस्था का सदस्य जब कभी वह किसी बैठक या पदीय कार्य में ऐसी पंचायती राज संस्था जिसका कि वह सदस्य या अध्यक्ष या उपाध्यक्ष हो, उसके क्षेत्र के बाहर भाग लें, ऐसी दरों पर दैनिक भत्ते का हकदार होगा, जो सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित की जाये।
1(1) पंचायत समिति/ जिला परिषद का सदस्य मय उनके अध्यक्ष या उपाध्यक्ष निम्न दरों पर दैनिक भत्ता प्राप्त करने के हकदार होंगे जब-जब वे बैठक में भाग लेेंवे अथवा अन्य शासकीय कार्य में हिस्सा लें-
परन्तु जब वे अपनी पंचायत समिति/ जिला परिषद क्षेत्र से बाहर जायेंगे-
(अ) ऐसे दिन के लिए कोई दैनिक भत्ता देय नहीं होगा जब उस स्थान पर ठहराव आठ घण्टे से कम हो। यदि यात्रा पंचायत समिति / जिला परिषद के वाहन से की जाये तो आठ घंटे से अधिक समय की यात्रा हेतु पूरी दर पर दैनिक भत्ता और 4 घण्टे से अधिक समय की यात्रा हेतु आधी दर पर दैनिक भत्ता प्राप्त करने का हकदार होगा।
(ब) प्रधान/प्रमुख को पंचायत समिति/ जिला परिषद मुख्यालय पर तथा उसके सामान्य आवास के स्थान पर कोई दैनिक भत्ता देय नहीं होगा।
(स) पंच/ सरपंच को पंचायत सर्किल के अन्दर कोई दैनिक भत्ता देय नहीं होगा।
क्र.सं. पद राजस्थान में जयपुर के जयपुर एवं अन्य राज्यों की दिल्ली, मुम्बई, चैन्नई, अलावा एवं राजस्थान राजधानियों के लिए (रू.) कलकत्ता एवं अन्य महानगरों के बाहर (रू.) के लिए(रू.) के लिए(रू.)
1. सरपंच 32 40 55
2. उप-सरपंच 32 40 55
3. प्रधान 65 80 100
4. उप-प्रधान 65 70 100
5. सदस्य, पंचायत समिति 55 60 80
6. प्रमुख 75 85 106
7. उप-प्रमुख 75 85 106
8. सदस्य, जिला परिषद 70 80 85
(2) राज्य सरकार या जिला परिषद द्वारा आयोजित प्रशिक्षण, या विमर्श गोष्ठी या सम्मेलन में उपस्थित होने के लिए भी दैनिक भत्ता देय होगा परन्तु यदि निशुल्क भोजन एवं आवास व्यवस्था हो तो दैनिक भत्ता एक चौथाई दर पर ही होगा।
[आदेश एफ 4(1) एल, एण्ड, जे. /आर डी.पी./95/3478 दिनांक 3.10.95]
30. यात्रा भत्ता - यदि नियम 28 में यथा-उल्लिखित कोई भी व्यक्ति उस नियम में विनिर्दिष्ट किन्हीं भी प्रयोजनों के लिए कोई यात्रा करता है तो वह तद्धीन उसे अनुज्ञेय दैनिक भत्ते के अतिरिक्त निधियों में से दोनों ओर की यात्रा के लिए यात्रा भत्ता प्राप्त करने का हकदार भी होगा, जो सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित की जावे।
31. भत्तों के दावे - (1) नियम 28 और 30 के अधीन अनुज्ञेय दैनिक और यात्रा भत्तों के लिए कोई दावा प्रपत्र सं.3 में लिखित में किया जायेगा।
(2) यात्रा और दैनिक भत्ते का दावा करने वाला कोई व्यक्ति इसके लिए अपने दावे पर निम्नलिखित प्रमाण-पत्र अभिलिखित करेगाः-
(क) प्रमाणित किया जाता है कि मुझे कोई निःशुल्क वाहन उपलब्ध नहीं करवाया गया था,
(ख) प्रमाणित किया जाता है कि दावाकृत यात्रा भत्ता नियमों के अनुसार है और उसमें दावाकृत रकम सही है,
(ग) प्रमाणित किया जाता है कि मैंने इस दावे के बारे में किसी भी स्रोत से पूर्व में कोई रकम दावाकृत प्राप्त नहीं की है,
(घ) प्रमाणित किया जाता है कि मैंने वास्तव में यात्रा की है।
32. यात्रा भत्ता बिलों पर प्रतिहस्ताक्षर - सदस्यों के यात्रा भत्ता बिल संबंधित पंचायत राज संस्था के अध्यक्षों द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित किये जायेंगे। अध्यक्षों के यात्रा भत्ता बिलों पर प्रतिहस्ताक्षरों की आवश्यकता नहीं होगी।
ये भी पढ़ें
| जन प्रतिनिधियों को देय मानदेय भत्ता अधिसूचना | 2494/ 04-01-2013 |
| जन प्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि के संबंध में अधिसूचना | 7204/ 10-10-2017 |
पंचायती राज संस्थाओं के अध्यक्षों और सदस्यों की शक्तियाँ, कृत्य और कर्त्तव्य
33. सरपंच के कर्तव्य और कृत्य - अधिनियम की धारा 3 के अनुसार ग्राम सभा बैठकें और धारा 45 में यथा-उपबंधित प्रत्येक पखवाडे पंचायत बैठकें आयोजित करने के अलावा सरपंच अधिनियम की धारा 32 में अधिकथित कृत्यों के अतिरिक्त निम्नलिखित कर्त्तव्यों का भी निर्वहन सुनिश्चित करने में सहायता करेगा:-
(1) नियमित कृत्य जैसे-
(क) स्वच्छता,
(ख) मार्ग में प्रकाश व्यवस्था,
(ग) सुरक्षित पेयजल,
(घ) जल-निकास,
(ड) सार्वजनिक वितरण प्रणाली,
(च) ग्रामीण सडकों का अनुरक्षण,
(छ) जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण,
(ज) सरपंच बाढ, अग्नि, महामारी और सरकारी सम्पत्तियों, भवनों, पाइप लाइनों, हैण्डपम्पों, विद्युत लाइनों के नुकसान के बारे में आवश्यक कार्यवाही इत्यादि करने के लिए कलेक्टर/ विकास अधिकारी को सूचना देगा।
(2) प्रशासनिक कृत्य जैसेः-
(क) आबादी क्षेत्र का विकास,
(ख) चरागाहों में, बाड़े बंदी और नियंत्रित चराई के माध्यम से घास और वृक्षों का विकास,
(ग) आबादी और गोचर भूमियों में अप्राधिकृत अतिक्रमणों को रोकना,
(घ) जलाशयों, नालों, प्राकृतिक उपज, मृत पशुओं की खाल और चर्म, भूमि के अस्थाई उपयोग, भूमि इत्यादि के विक्रय से स्वयं के आय के अधिकतम स्रोत जुटाना।
(3) पंचायत के निवासियों के कल्याण को सुनिश्चित करने हेतु स्थानीय भौतिक संसाधनों का विकास एवं समुचित उपयोग करना।
(4) मानव एवं पशु स्वास्थ्य, पोषण एवं परिवार कल्याण कार्यक्रमों में सहायता करना।
(5) ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम का संचालन।
(6) राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गो पर सेवा सुविधाओं का विकास करना जिससे दुकानों, ढ़ाबों, एस.टी.डी. बूथ, पेट्रोल पम्प, मरम्मत और सर्विस केन्द्रों इत्यादि के लिए स्थलों के नीलाम के माध्यम से स्त्रोत जुटाये जा सके।
(7) सामुदायिक संकर्मो के लिए लोक अभिदाय जुटाने हेतु प्रयत्न करना।
(8) सम्पूर्ण साक्षरता, महिला शिक्षा हेतु विशेष प्रयास करना, मृत्यु-भोज रोकना, बाल विवाह रोकना, अस्पृष्यता एवं महिलाओं के विरुद्ध उत्पीड़न रोकना!
(9) सामाजिक सुरक्षा दावे दिलाने में सहायता करना।
(10) वृद्धों, विधवाओं और विकलांग व्यक्तियों के लिये पेंशन स्वीकृति में सहायता करना।
(11) पंचायत निधियों के दुरुपयोग को रोकना और रोकड़ बही में हस्ताक्षर करने के पूर्व प्रत्येक पंचायत बैठक में आय-व्यय ब्यौरे रखकर पंचायत के कृत्यकरण में पारदर्शिता लाना।
यदि सरपंच द्वारा आवंटित निधि का उपयेाग नहीं किया जावे तो ऐसी दशा में जिला कलेक्टर ऐसी निधि के उपयोग हेतु, इस उद्देश्य से एक समिति गठित करने के लिए प्राधिकृत होगा।
(12) संनिर्माण संकर्मो की क्वालिटी का संधारण ओर संकर्म के पूरा होने के एक मास के भीतर-भीतर समापन प्रमाण-पत्र प्राप्त करना।
(13) पंचायत शोध्यों की समय पर वसूली के लिए माँग नोटिस और कुर्की वारण्ट जारी करने की व्यवस्था करना और पंचों की समिति के माध्यम से सचिव की सहायता से समुचित निष्पादन सुनिश्चित करना।
(14) प्रतिवर्ष संपरीक्षा करवाने की व्यवस्था करना और अपने निर्वाचन की अवधि के पश्चात भी अपनी पदावधि के संपरीक्षा आक्षेपों का अनुपालन करना।
(15) मंजूर किये गये संकर्मो और खर्च की गई रकम का ब्यौरा पंचायत मुख्यालय के पट्ट के साथ-साथ संकर्म स्थानों पर प्रदर्शित करना।
(16) जनता के कल्याण के लिए ऐसे ही अन्य समस्त कृत्य करना जो आवश्यक प्रतीत हो।
34. पंचायत के स्त्रोत जुटाने का कर्तव्य - (1) कर राजस्व जुटाने के अतिरिक्त सरपंच अन्य, पंचों के परामर्श से दरों, फीसों, प्रभारों और शास्तियों में वृद्धि करके, हवेलियों और बड़े पक्के गृहों पर अभिहित मात्र कर, राष्ट्रीय और राज्यमार्गो पर के ढाबों, होटलों, ओटोमोबाइल सर्विस स्टेशनों और मरम्मत की दुकानों, पेट्रोल/ डीजल पम्पों पर कर/ फीस उद्गृहीत करके भी गैर-कर राजस्व में वृद्धि करेगा। स्वयं की आय के विद्यमान रूप के अतिरिक्त प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत अधिक आय जुटाने का प्रयास किया जायेगा।
(2) इस हेतु पंचायत का प्रस्ताव पारित किया जायेगा।
35. प्रधान के कर्तव्य और कृत्य - अधिनियम की धारा 33 में प्रमाणित कर्तव्यों के अतिरिक्त प्रधान निम्नलिखित कृत्यों का भी निर्वहन सुनिश्चित करेगाः-
(1) पर्यवेक्षण कृत्यः-
(क) पंचायतों के कृत्याकरण का पुनर्विलोकन और मॉनिटरिंग करना,
(ख) नव निर्वाचित, विशेष रूप से महिला अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति सरपंचों और पंचों को प्रशिक्षण देना और उनका मार्गदर्शन करना,
(ग ) सरपंचों और पंचायत समिति और जिला परिषद् के सदस्यों में समन्वय,
(घ) सरपंचों की ऐसी बैठकें बुलाना जो आवश्यक हों!
(ङ) राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के उपबंधों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नियंत्रण रजिस्टर रखना,
(च) पंचायत समिति बैठकों और स्थानीय समितियों के विनिश्चयों के अनुपालन को नियंत्रण रजिस्टर के माध्यम से सुनिश्चित करना,
(छ) प्रतिवर्ष निर्वाचन ओर पुनर्गठन के तीन मास के भीतर-भीतर स्थायी समितियों के बनाये जाने को इस बात को ध्यान में रखते हुए सुनिश्चित करना कि किसी स्थाई समिति का कोई भी सदस्य कम से कम एक ऐसी स्थाई समिति में निर्वाचित हो गये हों,
(ज) कार्यस्थल एवं पंचायत मुख्यालय पर वास्तविक व्यय के दर्शाने वाले बोर्ड लगवाना।
(2) संधारण कृत्य-पेयजल, विद्युत, सिंचाई, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राजस्व भूमियों, मानव और पशु रोगों, फसल रोगों आदि से संबंधित स्थानीय समस्याओं की पहचान और संबंधित जिला स्तरीय अधिकारियों को चर्चा हेतु और सार्वजनिक शिकायतों को दूर करने के लिए अगली पंचायत समिति बैठक में बुलाना,
(3) विकास कृत्य-स्थानीय जनता की सुस्पष्ट आवश्यकता की पहचान करना तथा अपना गांव अपना काम योजना में जनता की भागीदारी के लिए स्थानीय जनता और स्वैच्छिक संगठनों को प्रोत्साहित करना,
(4) स्वयं के स्त्रोतों का जुटाया जाना- प्रधान अन्य सदस्यों के परामर्श से-
(क) अभियान के आधार पर शिक्षा उपकर के समय पर संग्रहण,
(ख) पंचायत समिति के स्वामित्व की दुकानों को नीलाम करना या उन्हें किराये देना,
(ग) पंचायत समिति के स्वामित्व के कृषि फार्मो का विकास,
(घ) हड्डी ठेकों इत्यादि में प्रतियोगी नीलामी बोलियों,
(ड़) पशु मेलों के उचित आयेाजन,
(च) तालाब तल खेती से आय और पंचायत समिति के प्रभाराधीन तालाबों के सिंचाई प्रभारों के संग्रहण
(छ) बेकार मदें और पुराने अभिलेखों आदि के निपटारें, के माध्यम से कर-राजस्व और गैर-कर राजस्व जुटाने के सभी प्रयास करेगा।
36. प्रमुख के कर्त्तव्य और कृत्य - अधिनियम की धारा 35 में प्रगणित कर्तव्यों के अतिरिक्त प्रमुख निम्नलिखित कर्तव्यों का भी निर्वहन सुनिश्चित करेगाः-
(1) योजना-स्थानीय आवश्यकताओं और स्त्रोतों के अनुसार प्रतिवर्ष दिसम्बर मास में पंचायत समितियों और नगरपालिकाओं की क्षेत्रीय योजनाओं को समेकित करने की व्यवस्था करना और सदस्यों तथा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कार्य करने वाले संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों के परामर्श से सम्पूर्ण जिले के लिए अंतिम योजना तैयार करवाना जैसा कि अधिनियम की धारा 121 द्वारा अपेक्षित है,
(2) पर्यवेक्षण भूमिका-जिले के लिए पंचायतों के भारसाधक अधिकारी के रूप में मुख्य कार्यपालक अधिकारी के माध्यम से यह सुनिश्चित करना किः-
(क) पंचायतों की ग्राम सभाएं अधिनियम और नियमों के उपबंधों के अनुसार नियमित रूप में आयोजित की जाती है,
(ख) पंचायतों की बैठकें प्रत्येक पखवाडे़ आयोजित की जाती हैं और अधिनियम तथा नियमों के माध्यम से पंचायतों पर डाले गये कर्तव्यों की उपेक्षा का कोई मामला नहीं है,
(ग) पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से संचालित कार्यक्रमों में जिला स्तरीय विभागों के साथ कठिनाईयों का निराकरण करना,
(घ) राज्य सरकार द्वारा विहित मानकों के अनुसार जिला परिषद् से संबंधित पंचायत समितियों और पंचायतों को निधियों का समय पर अंतरण करना,
(ड़) पर्यावरण सुधार के लिए जिले में ग्रामीण स्वच्छता और ग्रामीण आवासन कार्यक्रम चलाना,
(च) प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता का कालिक पुनर्विलोकन करना,
(छ) जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जनता की शिकायतें दूर करना,
(ज) लेखों का समुचित संधारण करके पंचायती राज संस्थाओं के कृत्यकरण में पारदर्शिता लाना, निधियों के दुरूपयोग को रोकना तथा प्रतिवर्ष समय पर संपरीक्षा कराना।
37. पंचायत समिति और जिला परिषद् के सदस्यों की भूमिका - (1) पंचायत समिति और जिला परिषद् का सदस्य पंचायतों की बैठकों में भाग ले सकते है, जिसमें वह साधारणतया निवास करता है।
(2) सदस्य ऐसी किसी पंचायत की, जिसमें ऐसा सदस्य निवास करता है, ग्राम सभा द्वारा सतर्कता समिति में नाम निर्देशित किये जा सकेंगे।
(3) ऐसा सदस्य पंचायती राज संस्था के सदस्य या स्थाई समिति के सदस्य के रूप में प्रदत्त कार्यो को सम्पन्न करेगा।
38. प्राकृतिक आपदाओं में सहायता - (1) बजट प्रावधानों के अध्यधीन रहते हुये प्रधान या प्रमुख क्रमशः अधिनियम की धारा 33 और 35 में अन्तर्विष्ट शक्तियों के अनुसार पीडितों को भोजन और आश्रय इत्यादि के लिये तुरन्त सहायता मंजूर कर सकेगा किन्तु वह प्रभावित परिवारों को राज्य सरकार की मार्फत सहायता पहुंचाने के लिये कलेक्टर को तुरन्त सूचित करेगा।
(2) वह इस हेतु स्वैच्छिक अंशदान जुटा सकेगा।
बैठकों में कारबार का संचालन
39. पंचायती राज संस्थाओं की बैठकें - कोई पंचायत एक पखवाड़े में कम से कम एक, कोई पंचायत समिति एक मास में कम से कम एक और कोई जिला परिषद् एक त्रिमास में कम से कम एक बैठक करेगी, तथापि, जिला परिषद् की किन्हीं दो बैठकों के बीच में चार मास से अधिक की कालावधि का अन्तर नहीं होगा।
परन्तु राज्य सरकार ऐसी तारीख को, जो उसके द्वारा नियत की जाये, बैठक आयोजित करने का निर्देश दे सकेगी।,
40 बैठकों का नोटिस - (1) बैठक का स्थान, तारीख और समय साथ ही उसमें संव्यवहृत किया जाने वाला कारबार विनिर्दिष्ट करते हुए कोई नोटिस किसी पंचायत की बैठक के कम से कम सात दिन पूर्व और किसी पंचायत समिति या किसी जिला परिषद् की बैठक के कम से कम दस दिन पूर्व क्रमश: सचिव, विकास अधिकारी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा संबंधित पंचायती राज संस्था के सभी सदस्यों को दिया जायेगा।
(2) पंचायत की दशा में सरपंच उप-नियम (1) में विनिर्दिष्ट से लघुतर नोटिस देकर कोई विशेष बैठक बुला सकेगा किन्तु किसी दशा में नोटिस की कालावधि तीन दिन से कम नहीं होगी।
(3) संबंधित पंचायती राज संस्था के प्रत्येक सदस्य को नोटिस उसके सामान्य निवास स्थान पर डाक द्वारा या ऐसी रीति से भेजा जायेगा जो सचिव/ विकास अधिकारी/ मुख्य कार्यपालक अधिकारी समीचीन समझे । नोटिस पंचायत की किसी बैठक की दशा में विकास अधिकारी, पटवारी और राज्य सरकार के या किसी पंचायती राज संस्था के किसी भी अन्य तहसील स्तर के कृत्यकारी का, जिसकी ऐसी बैठक के विचार-विमर्श में उपस्थिति और भाग लेना बैठक के संयोजक को वांछनीय प्रतीत हो और पंचायत समिति या जिला परिषद् की किसी बैठक की दशा में ऐसे जिला और तहसील स्तर के अधिकारियों को, जिनकी ऐसी बैठक में उपस्थिति धारा 48 की उप-धारा (7) के अधीन वांछनीय समझी जाये, भी भेजी जायेगी।
(4) प्रत्येक बैठक के नोटिस की एक प्रति संबंधित पंचायती राज संस्था के कार्यालय के सूचना-पट्ट पर भी चस्पा की जायेगी।
41. बैठक की कार्यसूची - (1) किसी बैठक के लिए कार्य सूची सचिव/ विकास अधिकारी/ मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा सरपंच/ प्रधान/ प्रमुख के परामर्श से तैयार की जायेगी और उसके अन्तर्गत ऐसा कोई भी विषय हो सकेगा जिस पर उसकी राय में पंचायत/ पंचायत समिति/ जिला परिषद् द्वारा विचार किया जाना चाहिए और उसके अन्तर्गत सरपंच/ प्रधान/ प्रमुख द्वारा विनिर्दिष्ट कोई भी विषय होगा।
(2) सदस्यों द्वारा किये जाने के लिए ईप्सित प्रस्ताव भी कार्यसूची में सम्मिलित किया जायेगा परन्तु संबंधित पंचायती राज संस्था का अध्यक्ष ऐसे किसी प्रस्ताव को अनुज्ञात कर सकेगा जिससे उसकी राय में अधिनियम या तद्धीन बनाये गये नियमों के उपबंधों का उल्लंघन होता हो और उसका विनिश्चय अंतिम होगा।
(3) पंचायत की कार्य सूची के मामलें में निम्नलिखित मदें सदैव सम्मिलित की जायेंगी-
(I) गत बैठक का पालन,
(II) रोकड़ बही के अनुसार आय और व्यय का विवरण,
(III) मृत कृषकों का नामान्तरण,
(IV) आबादी भूमि और चरागाहों में अधिक्रमण का हटाया जाना,
(V) विभिन्न योजनाओं की निधियों का उपयोग,
(VI) सनिर्माण संकर्मो की निधियों का उपयोग,
(VII) ग्राम स्वच्छता, सड़कों पर प्रकाष व्यवस्था, ग्रामीण सड़कों, पेयजल, आंगनबाड़ी, उचित मूल्य की दुकानों, विद्यालय भवनों के संधारण का पुनर्विलोकन,
(VIII) टीकाकारण और परिवार कल्याण।
42. विशेष बैठक - पंचायती राज संस्था का अध्यक्ष, जब कभी वह उचित समझे, किसी पंचायती राज संस्था की कोई विशेष बैठक बुला सकेगा और ऐसी पंचायती राज संस्था के सदस्यों का कुल संख्या के एक-तिहाई के अन्यून के निवेदन पर, निवेदन की प्राप्ति की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर-भीतर, बुलायेगा। यदि अध्यक्ष ऐसा करने में विफल रहे तो पंचायत की दशा में उपाध्यक्ष या विकास अधिकारी, पंचायत समिति की दशा में मुख्य कार्यपालक अधिकारी और जिला परिषद् की दशा में खण्ड आयुक्त पंचायती राज संस्था के सभी सदस्यों को किसी पंचायत की दशा मंे तीन पूर्ण दिन का नोटिस और पंचायत समिति या जिला परिषद् की दशा में सात पूर्ण दिन का नोटिस देने के पश्चात ऐसी बैठक बुला सकेगा।
43. मतदान के लिए प्रश्न रखने की रीति - जब कोई प्रश्न मतदान के लिए रखा जाये तो अध्यक्षता करने वाला प्राधिकारी हाथ उठाने के लिए कहेगा और वह पक्ष या विपक्ष में उठाये गये हाथों की गिनती करेगा और परिणाम घोषित करेगा। मत बराबर होने की दशा में अध्यक्ष का निर्णायक मत होगा।
44. बैठक की कार्यवाहियों का कार्यवृत्त - (1) किसी पंचायती राज संस्था की कार्यवाहियां हिन्दी में होंगी और कार्यवृत्त पुस्तक में किसी पंचायत की दशा में सचिव द्वारा, किसी पंचायत समिति की दशा में विकास अधिकारी द्वारा और किसी जिला परिषद् की दशा में मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा अभिलिखित की जायेंगी।
(2) कार्यवाहियों में उपस्थित सदस्यों की उपस्थिति के साथ-साथ उनके हस्ताक्षर और किया गया विनिश्चय सम्मिलित हेागा। यद्यपि, बैठक में प्रस्तावित विभिन्न संकल्पों के संबंध हुए विचार-विमर्श या चर्चा का ब्यौरा देना आवश्यक नहीं होगा फिर भी कार्यवाही अभिलिखित करने वाले पदधारी का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रत्येक ऐसे संकल्प का कारणो सहित ब्यौरा दे जो उसकी राय में अधिनियम या किसी भी अन्य विधि या तद्धीन बनाये गये नियमों के उपबंध या राज्य सरकार द्वारा जारी किये गये अनुदेशों से असंगत है।
(3) कार्यवाहियों की एक-एक प्रति पंचायत की दशा में पंचायत समिति को, पंचायत समिति की दशा में जिला परिषद् को, साथ ही पंचायत समिति के सभी सदस्यों को और जिला परिषद् की दशा में जिला परिषद् के सभी सदस्यों को भेजी जायेगी। ऐसी प्रतियां पन्द्रह दिन के भीतर-भीतर भेजी जायेंगी। उप-नियम (2) में यथानिर्दिष्ट अधिनियम या नियमों के उल्लंघन में (पारित) किसी भी संकल्प की दशा में, सचिव और विकास अधिकारी चौबीस घण्टे के भीतर-भीतर मुख्य कार्यपालक अधिकारी को रिपोर्ट करेगा तथा यदि ऐसा संकल्प जिला परिषद् द्वारा किया गया हो तो मुख्य कार्यपालक अधिकारी निदेशक, ग्रामीण विकास को रिपोर्ट करेगा। सचिव/ विकास अधिकारी/ मुख्य कार्यपालक अधिकारी बैठक के कार्यवृत्त के सुसंगत उद्धरण संबंधित विभागों के जिला/तहसील स्तर के अधिकारियों को भी उनका स्तर पर आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजेगा।
45. बोलने पर कतिपय निर्बन्धन - (1) कोई सदस्य भाषण बोलते समयः-
(क) ऐसे किसी विषय पर टिप्पणी नहीं करेगा जिस पर कोई न्यायिक विनिश्चय लम्बित है,
(ख) किसी पंचायत राज संस्था के किसी सदस्य या अध्यक्ष या उपाध्यक्ष या सरकार के किसी भी अधिकारी के विरूद्ध कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं लगायेगा,
(ग) संसद की या किसी भी राज्य या किसी भी अन्य पंचायती राज संस्था के विघान की कार्यवाहियों के संचालन के बारे में संतापकारी अभिव्यक्ति का उपयोग नहीं करेगा,
(घ) मानहानिकारक शब्द नहीं कहेगा,
(ड़) पंचायती राज संस्था के कारबार में बाधा डालने के प्रयोजन के लिए अपने भाषण के अधिकार का उपयोग नहीं करेगा, या
(च) विचार-विमर्श में अपने स्वयं के तर्को की या अन्य सदस्यों द्वारा दिये गये तर्को की असंगतता पर या उबाऊ पुनरावृत्ति पर डटा नहीं रहेगा।
(2) प्रस्थापक, जिसे उत्तर देने का अधिकार है, के सिवाय कोई सदस्य एक बार से अधिक नहीं बोलेगा।
46. भाषणों की अवधि - अध्यक्षता करने वाला प्राधिकारी अपने विवेक से भाषणों की अवधि विनियमित करेगा।
47. बैठक के विचाराधीन विषय में जब किसी सदस्य का धनीय हित हो तब प्रक्रिया - (1) अध्यक्षता करने वाला प्राधिकारी किसी भी सदस्य को ऐसे किसी विषय की चर्चा में मतदान करने का भाग लेने से प्रतिषिद्ध कर सकेगा जिसमें उसे यह विश्वास है कि जनता पर उसके साधारण लागूकरण के अलावा ऐसे सदस्य का स्वयं का या भागीदार के रूप में कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष धनीय हित है।
(2) ऐसा सदस्य अध्यक्षता करने वाला प्राधिकारी के विनिश्चय को चुनौती दे सकेगा जो तत्पश्चात उस प्रश्न को बैठक में रखेगा और बैठक का विनिश्चय अंतिम होगा। तथापि, संबंधित सदस्य उस समय मतदान करने का हकदार नहीं होगा जब ऐसा प्रश्न बैठक में रखा जाये।
48. पंचायत समिति और जिला परिषद् की बैठकों के लिए कारबार की व्यवस्था - (1) किसी बैठक में संव्यवह्नत किये जाने वाले कारबार की व्यवस्था सामान्यतः निम्नलिखित रूप में होगीः-
(क) शपथ या अभिज्ञान, यदि आवश्यक हो,
(ख) पूर्ववर्ती बैठक की कार्यवाहियों का पुष्टिकरण,
(ग) पूर्ववर्ती बैठक के विनिश्चयों पर की गई कार्यवाही का एक विवरण,
(घ) स्थायी समितियों की कार्यवाहियों का परिषीलन,
(ड़) महत्वपूर्ण कागजपत्रों (संपरीक्षा रिपोर्ट, निरीक्षण रिपोर्ट, परिपत्र, अनुदेश आदि) से संबंधित सूचना,
(च) पूर्ववर्ती तीन मास के लिए चालू स्कीमों की भौतिक और वित्तीय प्रगति रिपोर्ट,
(छ) वार्षिक योजना प्रस्तावों का क्रियान्वयन,
(ज) रोजगार पैदा करने और गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों का पुनर्विलोकन,
(झ) ग्रामीण स्वच्छता और ग्रामीण आवासन कार्यक्रम,
(ण) स्वयं की आय में वृद्धि के लिए उठाये गये कदम और राजस्व संग्रहण की प्रगति,
(ट) कोई भी अन्य कारबार जिसका लिया जाना अध्यक्षता करने वाले प्राधिकारी द्वारा अनुज्ञात किया जाये।
(2) अध्यक्षता करने वाला प्राधिकारी, अपने विवेक से या किसी भी सदस्य के प्रस्ताव पर उप-नियम (1) में प्रगणित कारबार की विभिन्न मदों की आपेक्षिक प्रक्रिया में ऐसे फेरफार कर सकेगा जिन्हें वह किसी मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए आवश्यक समझे।
49. किसी सदस्य का निकाला जाना - अध्यक्षता करने वाला प्राधिकारी ऐसे किसी भी सदस्य को, जिसका आचरण उसकी राय में घोर रूप से विच्छृंखल है, बैठक से तुरन्त निकल जाने का निदेश दे सकेगा और निकल जाने के लिए इस प्रकार आदिष्ट कोई भी सदस्य तुरन्त ऐसा करेगा और उस दिन की बैठक की शेष अवधि के दौरान अपने को अनुपस्थित रख्ेागा।
50. किसी बैठक का निलम्बन - अध्यक्षता करने वाला प्राधिकारी किसी पंचायती राज संस्था की बैठक में उद्भुत गंभीर अव्यवस्था की दशा में किसी भी बैठक को अपने द्वारा विनिश्चित किये जाने वाले समय के लिए निलम्बित कर सकेगा।
51. स्थायी समिति की बैठकों के संचालन के लिए प्रक्रिया - (1) जब पर्याप्त कार्यसूची मदों पर चर्चा की जानी हो तो स्थायी समिति का अध्यक्ष किसी भी समय बैठक बुला सकेगा । प्रत्येक त्रिमास में एक बैठक आयोजित की जायेगी। प्रत्येकमास में कम से कम एक बैठक आयोजित की जाएगी।
परन्तु राज्य सरकार ऐसी तारीख को, जो उसके द्वारा नियत की जाये, बैठक आयोजित करने का निदेश दे सकेगी।
(2) बैठक के नोटिस, कार्यवृत्त अभिलिखित करने, विनिश्चयों पर मतदान करने, बोलने पर निर्बन्धन करने और बैठकों के संचालन के लिए प्रक्रिया वही होगी जो पंचायत समिति या जिला परिषद् की विशेष बैठक के लिए हो।
(3) स्थायी समिति के लिए गणपूर्ति ऐसी समिति के अध्यक्ष को सम्मिलित करते हुए तीन की होगी।
52. स्थायी समितियों के परस्पर विरोधी सकल्प - किसी भी ऐसे मामले में जिसमें दो या अधिक स्थायी समितियों ने परस्पर विरोधी सकल्प पारित किये हों, विकास अधिकारी मामले को पंचायत समिति के और मुख्य कार्यपालक अधिकारी, जिला परिषद् के समक्ष रखेगा और पंचायत समिति/ जिला परिषद् के अंतिम विनिश्चय के लंबित रहते विकास अधिकारी/ मुख्य कार्यपालक अधिकारी विवादग्रस्त मामले के विषय में सारी कार्यवाही को रोके रखेगा।
53. अधिकारियों की उपस्थिति - (1) विकास अधिकारी या मुख्य कार्यपालक अधिकारी स्थायी समितियों की *बैठकों के लिए सचिव होगा और सभी बैठकों में उपस्थित रहेगा* जब तक कि वह बीमारी, छुट्टी या पंचायत समिति/जिला परिषद् के मुख्यालय से बाहर अत्यावश्यक पदीय कार्य के कारण निवारित न हो।
(2) ऐसे मामले मे *विकास अधिकारी या, यथास्थिति, मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा नियुक्त कोई अधिकारी सचिव के कृत्यों का पालन करेगा और ऐसी बैठकों में उपस्थित होगा*, और विकास अधिकारी या, यथास्थिति, मुख्य कार्यपालक अधिकारी के लौटने पर किये गये विनिश्चयों के बारे में सूचित करेगा।
*(3) यदि स्थायी समिति को यह प्रतीत हो कि सम्बन्धित पंचायती राज संस्था की अधिकारिता में पदस्थापित सरकार के किसी अधिकारी की उपस्थिति उसकी बैठकों में वांछनीय है, तो विकास अधिकारी या मुख्य कार्यकारी अधिकारी, बैठक की तारीख से कम से कम तीन दिन पूर्व ऐसे अधिकारी को सूचित करेगा और ऐसा अधिकारी जब तक कि बीमारी या किसी अन्य युक्ति युक्त कारण से निवारित न हो बैठक में उपस्थित होगा।*
54. विनिश्चयों का अनुपालन - स्थायी समितियों द्वारा किये गये विनिश्चयों और उन पर की गई कार्यवाही के बारे में क्रमश: पंचायत समिति/ जिला परिषद् की आगामी बैठक के पूर्व प्रधान/ प्रमुख को सूचित करने का विकास अधिकारी/ मुख्य कार्यपालक अधिकारी का कर्तव्य होगा।
55. प्रशासन और वित्त के लिए स्थायी समिति द्वारा रोक आदेश - अप्राधिकृत अधिक्रमण या अप्राधिकृत सन्निर्माण के संबंध में पंचायत समिति द्वारा पंचायतों के विनिश्चयों के विरूद्ध अपीलों पर विचार करते समय रोक आवेदन पर-
(क) पंचायत को सुनवाई का अवसर दिये बिना,
(ख) भूमि के प्रति हक का सत्यापन किये बिना,
(ग) पंचायत द्वारा दी गई सन्निर्माण अनुज्ञा के बिना, विनिश्चय नहीं किया जायेगा।
56. सदस्य का सूचना अभिप्राप्त करने का और अभिलेखों के प्रति पहुँच का अधिकारी - किसी पंचायती राज संस्था को सदस्य को, सचिव/ विकास अधिकारी/ मुख्य कार्यपालक अधिकारी को सम्यक् नोटिस देने के पश्चात कार्यालय समय के दौरान पंचायती राज संस्था या उसकी किसी स्थाई समिति, यदि कोई हो, के प्रशासन से सबंधित किसी भी विषय पर सूचना अभिप्राप्त करने का और उसके अभिलेखों के प्रति पहुँच का अधिकार होगा। तथापि, वे संबंधित पंचायती राज संस्था के अध्यक्ष के अनुमोदन से और, लेखबद्ध किये जाने वाले कारणों से कोई भी सूचना विशेष देने से या किसी भी अभिलेख विशेष के प्रति पहुँच अनुज्ञात करने से इन्कार कर सकेंगे।
करों और फीसों का अधिरोपण, निर्धारण और संग्रहण
57. कर / फीस के अधिरोपण के लिए पंचायती राज संस्था द्वारा संकल्प - धारा 65 66,67,68 और 69 के अधीन कोई भी कर या फीस या अधिभार उद्गृहीत करने का या किन्हीं भी दरों में वृद्धि करने का विनिश्चय करने वाली प्रत्येक पंचायती राज संस्था इस आशय का संकल्प साधारण बैठक में पारित करेगी और उसके सार को उससे संभाव्यतः प्रभावित होने वाले व्यक्तियों की सूचना के लिए प्रकाशित करेगी।
58. आक्षेप आमंत्रित करने के नोटिस का प्रकाशन - (1) संबंधित पंचायती राज संस्था ऐसे कर या फीस या अधिभार के अधिरोपण के प्रति आक्षेप आमंत्रित करने को ऐसी साधारण सूचना के लिए उक्त संकल्प का एक नोटिस जारी करेगी।
(2) उपर्युक्त नोटिस की एक प्रति संबंधित पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद् के नोटिस बोर्ड पर लगायी जायेगी और एक प्रति सूचना के लिए तहसीलदार और कलेक्टर को अग्रेषित की जायेगी।
(3) पंचायती राज संस्था साधारण प्रचार के लिए स्थानीय समाचार पत्रों को प्रेस नोट भी जारी कर सकेगी।
(4) जिला परिषद् स्टाम्प शुल्क पर अधिभार अधिरोपित करने का प्रस्ताव करते समय नोटिस की प्रति जिला रजिस्ट्रार को तथा कृषि उपज पर अधिभार के मामले में निदेशक , कृषि, विपणन और जिले में कृषि उपज मण्डी समितियों के सचिव को भी भेजेगी।
59. आक्षेपों के लिए कालावधि - आक्षेप फाइल करने के लिए ऐसे नोटिस की तारीख से कम से कम एक मास की कालावधि अनुज्ञात की जायेगी।
60. आक्षेपों पर विचार - (1) नोटिस की कालावधि की समाप्ति के पश्चात पंचायती राज संस्था द्वारा प्रस्तावित अधिरोपण या वृद्धि से संभाव्यतः प्रभावित होने वाले व्यक्तियों से प्राप्त आक्षेपों पर उसकी साधारण बैठक में विचार किया जायेगा।
(2) पंचायती राज संस्था प्रस्ताव का अनुमोदन उपान्तरणों सहित या रहित कर सकेगी या उन्हें अस्वीकृत कर सकेगी और उक्त कर या करों या फीसों के उद्गृहण के लिए पुनः संकल्प पारित करेगीः परन्तु यदि संकल्प धारा 65 की उप-धारा (1) के खण्ड (घ) तथा (छ) या धारा 68 की उप-धारा (2) के अधीन अधिरोपित किये जाने के लिए प्रस्तावित किसी कर से संबंधित हो तो राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी भी अभिप्राप्त की जायेगी।
[टिप्प्णी - अधिनियम की धारा 65(1)(घ), 65(1)(छ) तथा 68(2) के तहत कर एवं चुंगी लगाने के प्रस्ताव संबंधित विकास अधिकारी के माध्यम से विभाग को भेजने होंगे। शेष धाराओं के तहत प्रस्ताव सरकार को नहीं भेजने होंगे]
61. सरकार की पूर्व मंजूरी - राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी की अपेक्षा वाले करों के अधिरोपण के मामले में, संबंधित पंचायती राज संस्था अपने द्वारा प्राप्त किये गये आक्षेपों के सारांश के साथ-साथ उन पर अपनी टिप्पणियों सहित अपने संकल्प की एक प्रति और एक अनुरोध पत्र राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी के लिए निदेशक , ग्रामीण विकास को भेजेगी।
62. संकल्प का प्रकाशन और प्रवर्तन - (1) नियम 60 के उप-नियम (2) के अधीन संकल्प पारित करने और राज्य सरकार का अनुमोदन, यदि अपेक्षित हो, प्राप्त करने के पश्चात पंचायती राज संस्था निम्नलिखित को विनिर्दिष्ट करते हुए अंतिम रूप से एक नोटिस जारी करेगीः
(क) इस प्रकार मंजूर किये गये कर के ब्यौरे,
(ख) वह दर जिस पर उसे उद्गृहीत किया जायेगा,
(X) वह तारीख जिससे उसे निर्धारित और उद्गृहीत किया जायेगा,
(घ) कोई भी अन्य विषिष्टियां जो प्रभावित व्यक्तियों की सूचना के लिए आवश्यक हों।
(2) ऐसा नोटिस नियम 58 में विनिर्दिष्ट रीति से प्रकाशित भी किया जायेगा।
63. माँग की तैयारी और निर्धारित की गणना - (1) कर नियम 62 के अधीन जारी नोटिस में विनिर्दिष्ट तारीख से निर्धारित और उद्गृहीत किया जायेगा।
(2) तहसीलदार नियम 62 के अधीन संकल्प की प्राप्ति के पश्चात संबंधित पटवारी के माध्यम से माँग को तैयार और गणना को संचालित करवायेगा।
(3) पटवारी निर्धारणों की गणना करने के कार्यक्रम की सूचना विकास अधिकारी और पंचायत को देगा जो ऐसी गणना और माँग की तैयारी में सहायता करने के लिए पंचायत प्रसार अधिकारी, पंचों और सचिव को सहयोजित कर सकेंगे।
(4) माँग पटवारी द्वारा प्रपत्र 4 में तैयार की जायेगी।
64. तहसीलदार द्वारा निर्धारण का अनुमोदन - (1) तहसीलदार, पटवारी द्वारा करों की माँग, निर्धारण तैयार कर लिये जाने के पश्चात, उसकी जाँच करवायेगा और शुद्धियां, यदि कोई हों, करेगा, उनका अनुमोदन करेगा और एक प्रति संबंधित पटवारी को अग्रेषित करेगा।
(2) पटवारी अनुमोदित माँग अनुसार माँग पर्चियां संबंधित निर्धारिती का प्रपत्र 5 में जारी करेगा।
65. करों की नियत तारीखें - (1) नियम 64 के अनुसार निर्धारित कर, अप्रेल मास में पटवारी द्वारा जारी की जाने वाली माँग पर्चियों के अनुसार संगृहीत किये जायेंगे, कर की रकम मई मास में वार्षिक किस्त के रूप में जमा की जायेगी।
(2) विलंबित संदाय के लिए ब्याज जून की पहली तारीख से 12 प्रतिशत की दर से उद्गृहीत किया जायेगा।
66. निर्धारण के विरूद्ध अपील - ऐसे निर्धारण के प्रति कोई भी आक्षेप रखने वाला कोई भी निर्धारिती, यदि कर किसी पंचायत द्वारा उद्गृहीत किया गया है, तो उप-खण्ड अधिकारी को और यदि कर पंचायत समिति द्वारा उद्गृहीत किया गया है, तो कलेक्टर को और यदि कर जिला परिषद् द्वारा उद्गृहीत किया गया है, तो खण्ड आयुक्त को अधिनियम की धारा 71 में अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अनुसार अपील कर सकेगा।
67. करों की वसूली - (1) कर, पटवारी द्वारा वसूल किये जायेंगे जिसे संग्रहण प्रभार के रूप में 5 प्रतिशत का संदाय संबंधित पंचायत समिति के पी.डी. लेखे में या पंचायत लेखे में जमा की गई सकल कर प्राप्तियों में से ऐसी रकम की कटौती करके किया जायेगा।
(2) ऐसे निक्षेपों के ब्यौरे चालान रसीद नम्बर , संख्या. और तारीख को उपदर्शित करते हुए प्रति मास संबंधित तहसीलदार, विकास अधिकारी और पंचायत को अग्रेषित किये जायेंगे।
(3) पटवारी, प्रत्येक पंचायत या, यथास्थिति, पंचायत समिति के लिए प्रपत्र 6 में माँग संग्रहण रजिस्टर भी रखेगा। प्रत्येक वर्ष के लिए एक अलग रजिस्टर या एक पृथक् प्रभाग काम में लिया जायेगा।
(4) संबंधित पंचायती राज संस्था ऐसे करों की वसूली के लिए आवश्यक प्रपत्रों और रजिस्टरों का खर्च वहन करेगी।
(5) यदि पटवारी द्वारा उपर्युक्त उपनियम (1) (2) (3) में यथोपबंधित करों की वसूली नहीं की जाये तो वे अधिनियम की धारा 70 में उपबन्धतानुसार भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल किये जायेंगे।
(6) स्टाम्प शुल्क पर अधिभार जिले में ग्रामीण क्षेत्रांे में अन्तरित और जिला परिषद् के पी.डी. लेखे में अन्तरित संपत्तियों के लिए उप-रजिस्ट्रार द्वारा वित्त विभाग द्वारा अधिकथित प्रक्रिया के अनुसार संगृहीत किया जायेगा।
(7) कषि उपज पर अधिभार जिले में सचिव, मडी समिति द्वारा संगृहीत किया जायेगा और जिले की जिला-परिषद् के पी.डी. लेखे में प्रति मास जमा किया जायेगा।
68. फीस का उद्ग्रहण - *(1) पंचायत जनता के प्रति की गई सेवाओं के लिए निम्नलिखित अधिकतम दरों के अध्यधीन फीस उदगृहीत कर सकेगी-
(I) आवेदन की फीस - 10/- रुपये
(II)निवास, जाति, आय आदि के लिए प्रमाण-पत्र के लिए - 20/-रुपये (अजा/ जजा के लिए 50%)
(III) नामान्तरण आदि के लिए उत्तराधिकारियों के प्रमाण-पत्र - 40/-रुपये (अजा/जजा के लिये 50%)
(IV) विद्युत के लिए या पाइप द्वारा जल प्रदाय के अनापत्ति प्रमाण-पत्र - 40/-रुपये(अजा/जजा के लिये 50%)
(V) आबादी भूमि के क्रय के लिए आवेदन - 20/- रुपये
(VI) स्थल रेखांक तैयार करने और स्थल निरीक्षण करने के लिए व्यय - 50/- रुपये
(VII) आवेदन और मुद्रण को सम्मिलित करते हुये राशन कार्ड - 10/- रुपये
(VIII) 30 दिन के पश्चात जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रीकरण - 20/- रुपये
(IX) भवन निर्माण के लिए अनुज्ञा (पक्के निर्माण के लिये प्रति वर्ग मीटर)
(X) पंचायत द्वारा पूर्व में ही अनुमोदित स्थल रेखांक में परिवर्धन/परिवर्तन
(XI)पंचायत की अनुज्ञा के बिना अप्राधिकृत निर्माण का नियमितिकरण यदि स्पष्ट हक हो मार्ग के अधिकार में रुकावट ना हो - 10/- रुपये (प्रतिवर्ग मीटर) (अधिकतम 1000/-)
(XII) पेटोल/डीजल पम्प - 2500/-रुपये (प्रतिवर्ष)
(XIII) होटल/ढाबों/मोटर गाडी मरम्मत - 1000/-रुपये (प्रतिवर्ष)
(XIV) कोई भी अन्य कारोबार इकाई - 200/-रुपये (प्रतिवर्ष)
(XV) खनन के अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए संकल्प - 5000/-रुपये (प्रतिवर्ष)
(XVI) मोबाईल टावर - 10000/-रुपये (प्रतिवर्ष)
(XVII) अतिथि गृह/ होटल/ मोटल/ विश्रामगृह गृह के लिए फीस
(i) 5 कमरों तक - 1000/- रुपये (प्रतिवर्ष)
(ii) 6 से 10 कमरों के लिए - 2500/- रुपये (प्रतिवर्ष)
(iii) 11 से 15 कमरों तक - 4000/-रुपये (प्रतिवर्ष)
(iv) 16 और अधिक कमरों के लिए - 5000/-रुपये (प्रतिवर्ष)*
(2) ऐसी फीसें उदगृहत करने का निश्चय करने वाली पंचायत साधारण बैठक में संकल्प पारित करेगी और पंचायत सर्किल के निवासियों से तीस दिन के भीतर आक्षेप/ सुझाव आमन्त्रित करते हुये सूचना पट्ट पर नोटिस प्रकाशित करेगी।
(3) नोटिस की तारीख से तीस दिन की समाप्ति के पश्चात पंचायत, उपान्तरणों सहित या रहित संकल्प पुनः पारित कर सकेगी और आगामी मास की पहली तारीख से ऐसी फीसें प्रभारित करने का विनिश्चय कर सकेगी।
69. मेलों पर कर और फीसें - (1) पंचायत समिति/जिला परिषद् अपनी अधिकारिता के भीतर अपने द्वारा आयोजित और विनियमित किये जाने वाले मेलों तथा उत्सवों को विनियमित करने के लिए करों/फीसों के उद्ग्रहण का विनिश्चय कर सकेगी।
(2) ऐसी पंचायती राज संस्था किसी भी अधिकारी को मेला अधिकारी के रूप में पदाभिहित कर सकेगी।
(3) यदि कोई पशुमेला आयोजित किया जाये, तो रवन्ना फीस की दर संबंधित पंचायती राज संस्था द्वारा विनिश्चित की जायेगी।
(4) क्रेता अपने पशु का े तब तक मेला क्षेत्र के बाहर नहीं ले जायेगा जब तक कि उसने विहित फीस के संदाय के पश्चात प्रपत्र 8 में रवन्ना अभिप्राप्य न कर लिया हो।
(4) यदि कोई भी क्रेता रवन्ना के बिना अपने पशु को मेला क्षेत्र के बाहर ले जाते हुए पाया जाये, तो वह मेला अधिकारी के विवेकाधिकार पर ऐसी शास्ति, जो 200 रुपये प्रति पशुसे अधिक नहीं होगी, देने का दायी होगा।
(6) पशुओं के प्रवेश और निकासी के लिए जाँच चौकियां स्थपित की जायेंगी। मेला परिसर में प्रवेश करने वाले समस्त पशुओं के लिए मेला अधिकारी/जाँंच चौकी के प्रभारी द्वारा प्रपत्र 7 मंे प्रवेश पत्र जारी किया जायेगा।
(7) मेले में किये गये प्रत्येक विक्रय को प्रपत्र 9 में रजिस्टर किया जायेगा और क्रेता को सम्बन्धित पंचायती राज संस्था द्वारा नियत किये गये प्रभार के संदाय करने पर उसकी प्रति जारी जायेगी।
(8) कोई भी रवन्ना तब तक जारी नहीं किया जायेगा जब तक कि उप-नियम (7) में निर्दिष्ट रजिस्टार की एक प्रति प्रस्तुत न कर दी जाये।
70. देशी शराब पर चुंगी - *विलोपित*
*[राज. पंचायती राज (तृतीय संशोधन) नियम, 2011संख्या एफ.4(7) संशों / नियम/ विधि / पंरा./ 2010/ 1348
दिनांक 12.08.2011 द्वारा नियम हटाया गया , राजपत्र भाग 4(ग) दिनांक 18.8.2011 को प्रकाशित]
71. सिनेमा/थियेटर/विडियो शॉप पर मनोरंजन कर - (1) पंचायत समिति अधिसूचना संख्या एफ.8(76) एफडी/जीआर-4/73 दिनांक 9.3.1976 के अनुसार प्रति व्यक्ति टिकट की कीमत/ प्रभारांे क़े एक रुपया से अधिक न होने पर 100% की दर से मनोरंजन कर वसूल करेगी। यदि नियमित टिकट जारी नहीं किये जायें तो टिकटों की रकम प्रतिमास निर्धारित की जाये और तद्नुसार 100% कर वसूल किया जाये।
(2) यदि शोध्य रकम माँग पर जमा नहीं कराई जाये तो यह जिला कलेक्टर की मार्फ़त भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल की जायेगी।
72. व्यापारी, आजीविकाओं, व्यवसायों और उद्योगों पर कर की अधिकतम दरें - (1) पंचायत समिति निम्नलिखितानुसार अधिकतम के अध्यधीन रहते हुए कर उद्गृहीत कर सकेगीः-
(I) अधिवक्ता - 300/- प्रतिवर्ष
(II) आइल प्रेस, कॉटन प्रेस, मुद्रण प्रेस, भाण्डागार और अन्य उद्योग (कुटीर उद्योगों के सिवाय) -
1000/- प्रतिवर्ष
(III) साहूकार - 1000/- प्रतिवर्ष
(IV) थोक और खुदरा व्यापारी, नीलामी कर्ता, ठेकेदार, कमीशन अभिकर्ता, आढतिये, कर्मषालायें -
500/- प्रतिवर्ष
(V) क्लिनिक, नर्सिंग होम, निजी अस्पताल - 300/- प्रतिवर्ष
(VI) निजी व्यवसायी, वैद्य, होम्योपैथ, दन्त चिकित्सक, पशु शल्य चिकित्सक - 150/- प्रतिवर्ष
(VII) वास्तुकार/अभियन्ता - 300/- प्रतिवर्ष
(VIII) होटल, लीजिंग हाऊस चलाने वाले - 500/- प्रतिवर्ष
(IX) अखबारों के सम्पादक/स्वामी - 250/- प्रतिवर्ष
(X) व्यवसायिक कलाकार, फोटो ग्राफर, अभिनेता, नर्तक, संगीतज्ञ - 120/- प्रतिवर्ष
(XI) सरकस/सिनेमा/विडियो शॉपों के स्वामी - 100/- प्रतिवर्ष (टिकटों के विक्रय पर 100%
मनोरंजन कर के अतिरिक्त)
(XII) पशुओं, यानों, डेयरी के व्यवहारी - 250/- प्रतिवर्ष
(2) नियम 58 से 60 तक में उपबंधित करों के अधिरोपण की प्रक्रिया का अनुसरण किया जायेगा
सिवाय इसके कि इसमें सरकार की पूर्व मंजूरी अपेक्षित नहीं होगी।
भवन कर
73. भवन कर - धारा 165 की उप-धारा (1) के खण्ड (क) के अधीन भवनों पर कर पंचायत सर्किल के भीतर के भवनों पर उद्गृहणीय होगा और निम्नलिखित सीमाओं से अधिक नहीं होगा, अर्थात्-
प्रतिवर्ष कर की अधिकतम रकम
(I) जहॉं निर्मित पक्की छत का क्षेत्र 500 वर्ग फुट तक का हो - 100/- रु.
(II) जब क्षेत्र 501 से 1000 वर्ग फुट तक का हो - *300/-रु.*
(III) जब क्षेत्र 1001 से 2000 वर्ग फुट तक का हो - *500/-रु.*
(IV) जब क्षेत्र 2000 वर्ग फुट से अधिक का हो - *1000/-रु.*
परन्तु ऐसे घरों के लिए कोई भी कर संदेय नहीं होगा जो पत्थर/ईंटों से संनिर्मित्त नहीं है या जिनकी छत पत्थर की पट्टियों/आर.सी.सी. की नहीं है।
74. कर से छूट - (1) अधिनियम में या इन नियमों में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी सरायों, धर्मषालाओं, पुस्तकालयों, विद्यालयों, औषधालयों, वाचनालयों और धार्मिक तथा पूर्त प्रयोजन के लिए प्रयुक्त भवनों पर कोई भी कर उद्गृहीत नहीं किया जायेगा, तथापि यह इस उपबंध के अध्यधीन होगा कि उनसे या उनके किसी भी भाग से कोई भी किराया अर्जित न किया जाये।
(2) किसी पंचायत सर्किल के भीतर केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के सभी भवनों को तथा ऐसे सभी भवनों को, जो किसी पंचायत या किसी पंचायत समिति या किसी जिला परिषद् या किसी नगरपालिकाओं बोर्ड के हों, या उनमें निहित हों, नियम 73 के अधीन भवन कर के भुगतान से छूट दी जायेगी।
(3) कच्चे घरो, एकीकृत गा्रमीण विकास कार्यक्रम के चयनित परिवारों, इन्दिरा आवास और ऐसे पक्के घरों पर जिनका फर्ष क्षेत्र 200 वर्ग फुट से कम का हो कोई भी भवन कर उद्गृहीत नहीं किया जायेगा।
75. निर्धारण सूची तैयार किया जाना - (1) पंचायत, भवन कर के प्रयोजनार्थ, पंचायत सर्किल के भीतर अवस्थित भवनों पर कब्जा या,
यथास्थिति, स्वामित्व रखने वाले अधिभोगियों/स्वामियों की एक सूची तैयार करवायेगी।
(2) सूची में पक्के निर्माण और कच्चे निर्माण का क्षेत्र पृथक्-पृथक् अन्तर्विष्ट होगा।
(3) किराये की आय, यदि कोई हो, भी उपदर्शित की जा सकेगी।
(4) यदि भवन नियम 74 के अनुसार छूट प्राप्त प्रवर्ग का है तो इस तथ्य का उल्लेख निर्धारण सूची में किया जाना चाहिए।
(5) कर नियम 73 में विनिर्दिष्ट अधिकतम दरों के भीतर-भीतर पक्के घरों के क्षेत्र के अनुसार निर्धारित किया जायेगा
76. निर्धारण सूची का प्रकाशन - (1) नियम 75 के अधीन तैयार की गई निर्धारण सूची को उसकी एक प्रति निर्धारण सूची के प्रकाशन की तारीख से 15 दिन के भीतर-भीतर उसके प्रति आक्षेप आमन्त्रित करने के एक नोटिस के साथ पंचायत के नोटिस बोर्ड पर लगाकर प्रकाशित की जायेगी।
(2) इस आशय की एक घोषणा सम्पूर्ण पंचायत सर्किल में डोंडी पिटवाकर की जायेगी कि सूची इस प्रकार प्रकाशित कर दी गई है और पंचायत कार्यालय में उसका निरीक्षण किया जा सकता है और निर्धारण सूची के प्रकाशन की तारीख से 15 दिन के भीतर-भीतर पंचायत में उसके प्रति आक्षेप फाइल किये जा सकते हैं।
(3) पंचायत ऐसे किन्हीं भी आक्षेपों की सुनवाई करेगी जो उक्त कालावधि के भीतर-भीतर किये जायें और सरपंच द्वारा निर्धारण सूची का संषोधन यदि आवश्यकहो तो किया जायेगा और वह हस्ताक्षरित की जायेगी।
(4) इस प्रकार अन्तिम रूप प्रदत्त निर्धारण सूची की एक प्रति पंचायत के नोटिस बोर्ड पर चिपकायी जायेगी।
77. भवन कर की वसूली - भवनकर 1 अप्रेल से प्रारम्भ होने वाले सम्पूर्ण वर्ष के लिए अग्रिम तौर पर वसूल किया जायेगा।
चुंगी
78. चुंगी चौकियां और चुंगी सीमाएं - यदि कोई पंचायत धारा 65 की उप-धारा (1) के खण्ड (ख) के अधीन कोई चुंगी अधिरोपित करने का विनिश्चय करे तो चुंगी सीमाएं पंचायत सर्किल की बाह्य सीमाएं होंगी और पंचायत-
(क) वे मार्ग वर्णित कर सकेंगी जिनसे चुंगी के दायित्वाधीन माल और पशुचुंगी सीमाओं के भीतर लाये जावेंगे, और
(,ख) ऐसी चुंगी चौकियॉं, जो वह आवश्यकसमझे, प्रत्येक ऐसी चौकी को पंचायत के प्रभाराधीन रखते हुए स्थापित कर सकेगी और उनके लिए ऐसा अन्य स्थापन, जो वह ठीक समझे, कर सकेगी।
(ग) चुगी की दर वस्तुओं की कीमत के आधे प्रतिशतसे अधिक दर से अधिरोपित नहीं की जावेगी। आधे प्रतिशत से अधिक दर पर चुंगी अधिरोपित करने हेतु राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति प्राप्त की जावेगी।
(घ) पांच लाख से अधिक स्थायी पंूजी निवेश वाले उपायों पर चुंगी लगाने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति प्राप्त करना आवश्यकहोगा।
[टिप्पणी - राज्य सरकार के आदेश अनुसार चुंगी समाप्त की जा चुकी है।]
79. माल और पशु लाने वाले व्यक्तियों के कर्तव्य - (1) चुंगी सीमाओं के भीतरचुंगीसंदाय करने के दायित्वाधीन माल या पशुओं को लाने वाले या प्राप्त करने वाले सभी व्यक्ति चुंगी कर्मचारी को उद्गृहीण चुंगी शुल्क की रकम अभिनिष्चत, निर्धारित और संगृहीत करने में समर्थ बनाने के लिए माल या पशुओं से सम्बंधित ऐसे समस्त बिल, बीजक, रसीदें या ऐसी ही प्रकृति के अन्य दस्तावेज, जो उनके कब्जे में हो, प्रदर्षित या प्रस्तुत करेंगे और ऐसे व्यक्ति अपने माल का मूल्यांकन कराने के प्रयोजनार्थ चुंगी कर्मचारी को हर सुविधाएं उपलब्ध करायेंगे और जब अपेक्षा की जाये तो उन्हें उन पर चुंगी शुल्क के निर्धारण या संग्रहण के, ऐसे शुल्क के संदाय की जाँच या इन नियमों के किसी भी अन्य उपबंधों के क्रियान्वयन के प्रयोजनार्थ सम्पूर्ण माल या पशुओं या उनके किसी भी प्रभाग का निरीक्षण, वजन, परीक्षा, मापन या अन्यथा मूल्यांकन अथवा व्यवहार करने देंगे।
(2) शुल्क्य माल या पशुओं को लाने वाले व्यक्ति के कब्जे में कोई भी बीजक या बिल या अन्य सुसंगत दस्तावेज के न होने या उनमें दर्शाये गये मूल्य को चुंगी कर्मचारी द्वारा स्वीकार नहीं किये जाने की स्थिति में ऐसे व्यक्ति स्वयं द्वारा एक घोषणा कर और हस्ताक्षरित की जायेगी और माल या पशुओं को बाजार कीमत के अनुसार उन का बाजारो में मूल्याकन कराने के पश्चात चुंगी उद्गृहीत की जायेगी।
80. माल का निरीक्षण - प्रत्येक व्यक्ति, माँग किये जाने पर, किसी भी चुंगी कर्मचारी को अपने कब्जे के माल का निरीक्षण करने देगा।
81. चुंगी का निर्धारण – जहाँ कोई मूल्यानुसार चुंगी उद्गृहणीय हो वहाँ उसकी रकम की गणना, माल या पशुओं के मूल बिल या बीजक अन्य दस्तावेजां में दिये गये पूर्ण मूल्य के अनसु ार या, यथास्थिति, उनकी बाजार कीमत पर की जायेगी: परन्तु पंचायत किसी सहकारी सोसाइटी द्वारा परिवहित कराये गये माल पर प्रतिमास तयषुदा दरों पर चुंगी अधिरोपित कर सकेगी: परन्तु यह और कि पंचायत, पंचायत सर्किल में स्थित किसी भी उद्योग द्वारा प्रसंस्करण के प्रयोजनार्थ आयात किये गये माल पर चुंगी शुल्क मासिक रूप से तयषुदा दरों पर अधिरोपित और वसूल कर सकेगी तथापि, इस शर्त के अध्यधीन की आयात के प्रयोजन को सम्बन्धित जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक द्वारा सत्यापित किया जाये।
स्पष्टीकरण-‘‘पूर्ण मूल्य‘‘ में रेल भाडा, कमीशन या अन्य आनुषंगिक प्रभार सम्मिलित नहंी हैं।
82. चुंगी का संदाय - (1) चुंगी किसी चुंगी चौकी के प्रभारी अधिकारी द्वारा माँंगे जाने पर संदेय होगी।
(2) चुंगी के दायित्वाधीन माल या पशुओ पर चुंगी शुल्क किसी चुंगी चौकी या पंचायत कार्यालय पर संदत्त की जावेगी।
(3) जहाँ कोई भी चुंगी न हो वहाँं आयातकर्ता आयातित माल के मूल्य की एक घोषणा फाईल करेगा और वास्तविक वाउचरों के आधार पर सरपंच या सचिव का समाधान करेगा।
(4) किसी चुंगी चौकी का प्रभारी कर्मचारी या सचिव संदाय किये जाने पर प्रपत्र 10 में दो प्रतियों में एक रसीद लिखेगा जिसकी एक प्रति आयातकर्ता को दी जायेगी और दूसरी रसीद पुस्तिका में प्रतिपर्ण के रूप में रहेगी।
(5) पंचायत क्षेत्र में नियमित कारबार करने वाले व्यापारी भी मासिक आधार पर आयात किये जाने के लिए संभावित माल के मूल्य को घोषित कर सकेंगे और अग्रिम रूप से चुंगी जमा करा सकेंगे। पंचायत ऐसे माल के वास्तविक मूल्य को वाउचरांे में/व्यापारी द्वारा किये गये विक्रय के आधार पर निर्धारित करने के लिए स्वतन्त्र होगी।
83. रेल या मोटर परिवहन अभिकरण द्वारा लाया गया माल - (1) रेल से लाया गया माल या पशुजैसे ही रेल्वे के माल या सामान
यार्ड से बाहर जायें, चुगी की सीमाओं में प्रविष्ट हुये समझे जायेंगे और तब वे उसी रीति से चुंगी शुल्क के दायित्वाधीन होंगे जिससे सड़क द्वारा लाये जाने वाले माल या पशु होते हैं।
(2) मोटर परिवहन अभिकरणों या परिवहन के अन्य साधनों द्वारा लाया गया माल या पशु, चुंगी शुल्क के दायित्वाधीन होंगे, यदि वे चुंगी चौकी पर इस प्रकार दायित्वाधीन हैं, या जहाँ ऐसी कोई भी चौकी नहीं हैं वहाँं चुंगी शुल्क पंचायत कार्यालय में संदत्त किया जायेगा।
84. डाक से प्राप्त माल - (1) डाक-पार्सलों से प्राप्त माल, यदि वह चुंगी के दायित्वाधीन है, पंचायत कार्यालय में पेश किया जायेगा और उस पर चुंगी की रकम नियम 82 के उप-नियम (4) के अनुसार निर्धारित, वसूल और संदत्त की जायेगी।
(2) पंचायत डाक प्राधिकारियों के साथ ऐसी व्यवस्थाएं कर सकेगी जिनके द्वारा डाक-पार्सलों से प्राप्त समस्त माल की सूची, प्रेषितियों के नामों के साथ, पंचायत कार्यालय पर अभिप्राप्त की जा सकेगी और यदि ऐसा कोई भी पार्सल उस पार्सल की प्राप्ति के एक मास के भीतर-भीतर पंचायत कार्यालय में पेश नहीं किया जायें, तो पंचायत प्रेषिती के विरूद्ध ऐसे कदम उठा सकेगी जो उप-विधियों में उपबंधित किये जायें।
85. तुरंत परिवहन के लिए माल - (1) यदि चुंगी चौकी के प्रभारी व्यक्ति को यान के डाइवर के पास की माल रसीद के आधार पर यह समाधान हो जाय कि माल पंचायत की सीमाओं के बाहर तत्काल परिवहन किये जाने के लिए है, तो वह माल के पंचायत सीमाओं के बाहर सुरक्षित परिवहन के लिए प्रपत्र 11 में ऐसी रकम प्रभारित करेगा जो पंचायत द्वारा नियत की जाये।
(2) अभिवहन की कालावधि साधारणतया चार घण्टे से अध्ािक की नहीं होगी किन्तु यान के ठप्प हो जाने आदि की दशा में सरपंच उसमें 24 घण्टे तक की यथोचित छूट दे सकेगा।
(3) यदि कोई यात्रा अभिकर्ता कोई माल विक्रय या प्रदर्षन के लिए लाये, तो वह देय चुंगी शुल्क जमा करायेगा किन्तु अविक्रीत और न पंचायत सीमा के बाहर परिकृष्त माल के लिए प्रतिदाय का दावा 7 दिन के भीतर-भीतर कर सकेगा।
(4) यदि पंचायत सर्किल में निवास करने वाला कोई यात्रा अभिकर्ता विक्रय के लिए माल ले जाये, तो वह चुंगी चौकी पर दो प्रतियों में वस्तुओं की एक पूर्ण सूची देगा। एक प्रति अभिकर्ता को सम्यक् रूप से सत्यापित करके लौटा दी जायेगी। यदि वह 15 दिन की कालावधि के भीतर-भीतर सम्पूर्ण माल या उसका कोई भाग वापस लाये, तो यदि माल वहीं हो जो उस सूची में उल्लिखित किया गया था तो कोई भी चुंगी प्रभारित नहीं की जायेगी।
86. चुंगी में छूट - इन नियमों में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, चुंगी निम्नलिखित माल पर उद्गृहित नहीं की जायेगी, अर्थात्ः-
(1) गोबरर्, इंधन, घास, चारा और शाखा काष्ठ के सिर पर ले जाये गये भार,
(2) ऐसा माल जिस पर संदेय चुंगी एक रुपये से कम हो,
(3) सेना के, या राज्य या केन्द्र सरकार के पुलिस या किन्हीं भी अन्य विभागों के उपयोगार्थ आयुध,
(4) पंचायत सर्किल में विनिर्मित या उत्पादित वस्तुएँ,
(5) किसी व्यक्ति द्वारा पंचायत सर्किल के भीतर अपने निवास पर रहने के लिए आने के अवसर पर आयात किया गया सद्भाविक वैयक्तिक और घरेलू माल,
(6) किसी बारात के फीते सहित या रहित पहनने के वस्त्र, बर्तन, उपस्कार और खाने की वस्तुएॅं,
(7) किसी पंचायत सर्किल के नये उद्योग स्थापित करने या उनके विस्तार के प्रयोजनार्थ या विद्यमान उद्योगों में की मषीनरी के नवीनीकरण या मरम्मत के लिए आयात की गयी मषीनरी, यदि आयातकर्ता राज्य के उद्योग विभाग से ऐसे आयात के प्रयोजन को सत्यापित करने का कोई प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर दे,
(8) पंचायत सर्किल में आयात किया गया उर्वरक,
(9) नये उद्योगों को स्थापित करने या विद्यमान उद्योगांे के विस्तार के प्रयोजनार्थ किसी भी पंचायत सर्किल में लायी गयी समस्त संरचना सामग्री, कच्ची सामग्री और संनिर्माण सामग्री निदेशक , उद्योग राजस्थान, जयपुर या उनके सम्यक् रूप से प्राधिकृत प्रतिनिधि से यह प्रमाण-पत्र पेश करने के अध्यधीन रहते हुए कि ये मदें पूर्वोक्त प्रयोजनों के लिए आवश्यकहै: परन्तु छूट निदेशक उद्योग विभाग द्वारा दिये जाने वाले प्रमाण-पत्र के अध्यधीन रहते हुए, उद्योग की स्थापना/विस्तार की तारीख से 7 वर्ष की कालावधि के लिए उपलभ्य होगी,
(10) राज्य सरकार के विशेष आदेश द्वारा किसी अन्य वस्तु के लिये दी गई छूट।
स्पष्टीकरणः- (1) संनिर्माण सामग्री पर छूट कारखाना शैड, कार्यालय भवन और चौकीदारी के क्वार्टरों के संनिर्माण में प्रयुक्त सामग्री पर लागू होगी। यह अन्य प्रवर्गो पर लागू नहीं होगी।
(2) कच्चे माल में पैकिंग सामग्री, उपस्कर, फिक्स्चर, पैट्रोल, तेल, स्नेहक, कोयला, इमारती लकड़ी, वातानुकूलन और प्रषीतन संयंत्र तथा विद्युतीकरण के लिए प्रयुक्त अन्य वस्तुएॅं सम्मिलित नहीं होंगी।
87. चुंगी के संदाय के उपवंचन के लिए शास्ति - यदि किसी पंचायत सर्किल में होकर गुजरने वाला माल या पशु चुंगी शुल्क के संदाय के दायित्वाधीन हो तो प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो पंचायत को धोखा देने के आशय से चुंगी सीमाओं के भीतर ऐसे किसी माल या पशुओं का प्रवेश करवाता है या दुष्प्रेरित करता है, या स्वयं प्रविष्ठ करने का प्रयास करता हैं, जिनके संबंध में ऐसे प्रवेश पर देय चुंगी न तो संदत्त और न ही निविदत्त की गयी हैं, ऐसे जुर्माने से दण्डनीय होगा जो ऐसीचुंगीकी रकम का दस गुना तक हो सकेगा।
88. उप-विधियाँ - इन नियमों के अधीन देय चुंगी के विनियमन, निर्धारण, वसूली और संदाय के संबंध में इनकी अनुपूर्ति के लिए पंचायत द्वारा अधिनियम के अधीन ऐसी उप-विधियां बनायी जा सकेंगी जो इन नियमों से असंगत न हो।
यान कर
89. कर के दायित्वाधीन यानों का रजिस्टर - (1) जब किसी पंचायत ने धारा 65 की उप-धारा (1) के एक्ट (X) के अधीन यान पर कर उद्गृहित करने का विनिश्चय किया हो और इसके संबंध में नियम 59 से 62 तक में अधिकथित प्रक्रिया का पालन कर लिया हो तो पंचायत ऐसे कर के दायित्वाधीन यानों का एक रजिस्टर, प्रत्येक ऐसे यान के स्वामी का नाम और पता तथा उसके संबंध में देय कर की रकम विनिर्दिष्ट करते हुए, तैयार करवायेगी।
(2) कोई भी व्यक्ति, जो किसी यान को रखता है या भाड़े पर बनाता है चाहे वह ऐसे यान का स्वामी हो या उसका कब्जा रखने वाला कोई व्यक्ति हो या उसका उधारगृहिता हो या किसी भी अन्य हैसियत में उसका प्रभार रखता हो, उस यान पर का कर देने का दायी व्यक्ति समझा जायेगा।
(3) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो किसी यान का कब्जा लेता है जिसके लिए वह कर देने का दायी है उसका कब्जा लेने के 15 दिन के भीतर-भीतर ऐसे यान का कब्जा लेने के तथ्य की लिखित सूचना देने के लिए बाध्य होगा।
(4) किसी भी ऐसे व्यक्ति की, जिसका नाम उप-नियम (1) में निर्दिष्ट रजिस्टर में दर्ज किया जाये या ऐसे किसी भी व्यक्ति के अभिकर्ता को उक्त रजिस्टर का निःषुल्क निरीक्षण करने दिया जायेगा और उसके किसी भी प्रयास से ऐसे उद्धरण जो उस व्यक्ति से संबंधित हो, लेने दिये जायेंगे।
(5) जब जब भी आवश्यकहो, पंचायत ऐसे रजिस्टर को सही करवायेगी।
90. यान कर में छूट - कोई भी यान कर किसी यान के संबंध में तब उद्ग्रहणीय नहीं होगा-
(क) यदि वह मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का केन्द्रीय अधिनियम 59) के अन्तर्गत कोई मोटर यान हो, या
(ख) यदि वह खेती के प्रयोजनार्थ प्रयुक्त होता है, या
(ग) यदि वह केन्द्र या राज्य सरकार का कोई यान हो, और सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त हो, या
(घ) यदि वह पंचायत समिति या जिला परिषद का हो।
91. कर की अग्रिम वसूली और अनुज्ञप्ति का जारी किया जाना - (1) यान कर प्रतिवर्ष अग्रिम रूप में संदेय होगा।
(2) जब कोई भी व्यक्ति किसी भी यान के संबंध में देय कर की रकम का संदाय करे, तो पंचायत उसे, ऐसे यान को उस कालावधि के लिए, जिससे संदाय संबंधित है, रखने या उपयोग करने के लिए प्रपत्र संख्या नम्बर 12 में अनुज्ञप्ति मंजूर करेगी।
92. कर की वसूली जब संदाय नहीं किया जाये - (1) यदि किसी यान के संबंध में कर नियम 91 के उप-नियम (1) के अनुसार संदत्त नहीं किया जाये तो सरपंच या पंचायत द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई भी कर्मचारी किसी भी समय यान को तब तक अधिगृहित कर सकेगा और विरूद्ध रख सकेगा जब तक ऐसा व्यक्ति समाधान के लिए यह साबित न कर दे कि उसने यान कर संदत्त कर दिया है।
(2) यदि अधिगृहित यान का दावा और उस पर देय कर का संदाय ऐसे अभिग्रहण की तारीख के पन्द्रह दिन के भीतर-भीतर न किया जाये तो पंचायत यह निर्देश दे सकेगी कि यान को लोक नीलाम द्वारा बेच दिया जाये और विक्रय के आगमों को यान पर देय कर के संदाय में उपायोजित कर लिया जाये।
(3) कर के रूप में शोध्य रकम के साथ-साथ कर की रकम की दुगुनी से अनधिक ऐसी शास्ति जिसका पंचायत निर्देश दे और अभिगृहण निरोध और विक्रय के संबंध में उपगत प्रभारी के मद्दे 200 रु. (दौ सौ रुपये) की राशि भी संदेय होगी और विक्रय आगमों में से वसूलीय होगी।
(4) यदि यान का स्वामी या उसका हकदार अन्य व्यक्ति अभिगृहण की तारीख से एक सप्ताह के भीतर-भीतर या विक्रय के पूर्व किसी भी समय उसके लिए दावा करें, तो वह उसे उस पर शोध्य कर और 200 रु. (दो सौ रुपये) के अनधिक ऐसी शस्ति जिसके लिए पंचायत निर्देश दे, संदाय पर लौटा दिया जायेगा।
वाणिज्यिक फसलों पर कर
93. विवरणियों का प्रस्तुत किया जाना - धारा 65 की उप-धारा (1) के खण्ड के अधीन वाणिज्यिक फसलों पर कर के अधिरोपण के लिए नियम 58 से 62 तक में अधिकथित प्रारम्भिक प्रक्रिया का पालन कर लिये जाने के पश्चात पंचायत सर्किल के भीतर अपने द्वारा अधिग्रहण भूमि पर धारा 65 के स्पष्टीकरण में पारिभाषित कोई भी वाणिज्यिक फसल उगाने वाले प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसी फसल काटने के कम से कम एक मास पूर्व पंचायत के सरपंच को उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करे और निम्नलिखित उपविषिष्टयां अन्तर्विष्ट करने वाली विवरणी दें,
(क) उस गांव का नाम जिसमें वे भूमियॉं स्थित हैं जिन पर इस प्रकार फसल उगायी गयी है,
(ख) इन भूमियों का हेक्टेयर की दृष्टि से क्षेत्रफल जिनमें ऐसी वाणिज्यिक फसल उगायी गयी है,
(ग) उगायी गयी वाणिज्यिक फसल की प्रवृत्ति, और
(घ) ऐसे उगाने वाले का नाम, पिता का नाम और निवास स्थान।
94. जॉंच और कर का निर्धारण - (1) सरपंच विवरणी को सत्यापित करने के प्रयोजनार्थ ऐसी जाँच कर या करवा सकेगा जो आवश्यकसमझे और यदि वह ठीक समझे तो खेती के अधीन क्षेत्र को वास्तविक मापमान द्वारा या पटवारी के द्वारा रखे गये गिरदावरी अभिलेख से अभिनिश्चित करवा सकेगा।
(2) ऐसी जाँच के पूर्ण होने पर, तीन पंचों और सचिव से गठित एक समिति उस क्षेत्र का, जिसमें कोई वाणिज्यिक फसल उगायी गयी है, उसकी सम्भावित कुल उपज का और उस पर उद्गृहणीय कर की रकम का निर्धारण करेगी।
(3) उप-नियम (2) के अधीन निर्धारण कर लिये जाने के पश्चात सरपंच ऐसे निर्धारण का एक नोटिस व्यक्ति को दिलायेगा जिसने विवरणी दी थी।
(4) वाणिज्यिक फसलों पर कर की दर भू-राजस्व की दरों के बराबर की राशि होगी।
95. विवरणी प्रस्तुत करने में विफलता - यदि कोई्र व्यक्ति नियम 93 द्वारा उपेक्षित कोई विवरणी प्रस्तुत करने में विफल रहे तो सरपंच नियम 94 के उप-नियम (2) में निर्दिष्ट समिति के अनुमोदित से, पटवारी से या अन्यथा प्राप्त सूचना पर किसी भी समय अपनी सर्वोत्तम विवेक बुद्धि से नियम 94 द्वारा अनुध्यात निर्धारण कर सकेगा और ऐसे प्रत्येक मामले में नोटिस द्वारा पंचायत सर्किल के भीतर-भीतर की किसी भूमि पर वाणिज्यिक फसल उगाने वाले व्यक्ति को ऐसी निर्धारण की सूचना देगा।
96. निर्धारण में कमी करना - किसी निर्धारिती से या औेर से यह सूचना प्राप्त होने पर कि किसी कृषिक विपत्ति के कारण वाणिज्यिक फसल को किसी प्रकार से क्षति या नुकसान हुआ है, सरपंच जाँच करेगा और यदि उसकी राय में फसल को सारवान् नुकसान होना साबित होता है तो वह नियम 94 के उप-नियम (2) में निर्दिष्ट समिति के अनुमोदन से निर्धारित में यथोचित कमी कर सकेगा।
जल कर
97. जल कर अधिरोपित करने के लिए संकल्प - यदि कोई पंचायत, पंचायत सर्किल के भीतर सुरक्षित पेय-जल प्रदाय की व्यवस्था करने और उसे बनाये रखने के लिए धारा 65 की उप-धारा (1) के खण्ड (ड़) के अधीन जल कर अधिरोपित करने का विनिश्चय करे, तो वह ऐसा करने के अपने आशय का एक संकल्प पारित करेगाी।
98. जल कर और अन्य प्रभार - (1) किसी गांव में जहाँं पेयजल का प्रदाय किसी सार्वजनिक नल, पम्प और टंकी स्कीम या हैण्ड पम्पों के जरिये किया जाता है जिसे पंचायत चलाती है या जिसका संचालन और संधारण राज्य सरकार द्वारा पंचायत को सौंपा गया हो या पेयजल आपूर्ति के लिए पंचायत द्वारा सरकार को कोई राशि दी जाती है। उस गांव का प्रत्येक निवासी पाईप द्वारा जल प्रदाय के मामलो ंमें 1 रुपये ( एक रुपया) प्रति व्यक्ति प्रति मास और अन्य मामलों मंे इस तथ्य को विचार में लाये बिना कि वह सार्वजनिक नल/हैण्ड पम्प का प्रयोग करता है या नहीं 0.50 मासिक जल कर संदत्त करेगा। जहाँ जल का प्रदाय किसी उपभोक्ता के परिसर में बिना किसी मीटर के किया जाता हो, वहाँ 20 रुपये प्रति नल प्रति परिवार प्रभारित किया जायेगा।
(2) यदि कोई मीटर, उपभोक्ता को संबंधित पंचायत द्वारा उपलब्ध कराया गया हो, तो 5 रुपये प्रतिमास की दर से जल प्रभार और मीटर किराया जन स्वास्थ्य अभियान्त्रिकी विभाग समय-समय पर निर्धारित दरों के अनुसार संगणित और वसूल किया जायेगा। उपभोक्ता को अपना स्वयं का मीटर लगाने के लिए भी अनुज्ञात किया जायेगा। ऐसे मामले में 5 रुपये मीटर किराया प्रभारित नहीं किया जायेगा।
(3) कोई भी व्यक्ति या तो स्वयं या अपने सेवकों या अभिकर्ताओं के जरिये संनिर्माण के प्रयोजनों के लिए सार्वजनिक नल से जल तब तक अभिप्राप्त करेगा जब तक कि विनिर्दिष्ट प्रभारों के अग्रिम संदाय के पश्चात संबंधित पंचायत से अनुज्ञा अभिप्राप्त न कर ली गयी हो। यदि कोई व्यक्ति संनिर्माण प्रयोजनों के लिए इन नियमों का उल्लंघन करते हुए सार्वजनिक नल से जल का उपयोग करता हुआ पाया जाये, तो वह जल कर की रकम के अतिरिक्त 200 रुपये तक का जुर्माना और 10 रुपये प्रतिदिन की ऐसी शास्ति, जो पंचायत विनष्चिय करे, देने का दायी होगा।
99. जल कर की वसूली - जल कर की वसूली निम्नलिखित रीति से की जायेगी-
(क) संबंधित पंचायत सार्वजनिक नल के लिए तथा निजी कनेक्षनों के लिए पृथक्-पृथक् बिल तैयार करेगी और उन्हें संबंधित व्यक्ति के पास संदाय की वास्तविक तारीख से कम से कम 7 दिन पर्वू पहुंचाने की व्यवस्था करेगी।
(ख) ऐसे प्रत्येक बिल में रकम, उसकी प्रकृति वह व्यक्ति जिससे वह शोध्य है और वह कालावधि जिसके लिए वह शोध्य है, और देय होने की तारीख के भीतर-भीतर जमा कराने पर 20% की रिबेट, विनिर्दिष्ट होगी।
(ग) यदि उस व्यक्ति द्वारा जल कर का संदाय 7 दिन के भीतर-भीतर न किया जाये, तो रिबेट अनुज्ञात नहीं की जायेगी और बिल की पूरी रकम, 15 दिन का नोटिस देने क पश्चात कुर्की वारण्ट की प्रक्रिया द्वारा वसूल की जायेगी।
(घ) उपभोक्ता के परिसर पर के निजी कनेक्षनों के मामले में, प्रभारी का समय पर संदाय करने में व्यतिक्रम करने पर, उपभोक्ता को 15 दिन का नोटिस देने के पश्चात कनेक्शन काट दिया जायेगा। उक्त कनेक्शन पंचायत द्वारा उद्गृहित शोध्यों का दुगुनी के बराबर शास्ति के साथ देयों का संदाय करने पर नवीकृत किया जायेगा।
100. जल कर के लिए उप - विधियों का बनाया जाना-संबंधित पंचायत अपने पंचायत सर्किल में जल प्रदाय को विनियमित करने के लिए विस्तृत उप-विधियां बना सकेगी।
तीर्थ यात्री कर
101. तीर्थ यात्री कर का अधिरोपण - कोई पंचायत, नियम 58 से 62 तक में अधिकथित प्रक्रिया का अनुसरण करने के पश्चात अधिनियम की धारा 65 की उप-धारा (1) के खण्ड (घ) के अधीन कोई तीर्थ यात्री कर लगाने का विनिश्चय कर सकेगी।
102. कर की कालावधि - स्थायी तीर्थ यात्रा के किसी स्थान के मामले में कर, वर्ष पर्यन्त अधिरोपित किया जा सकेगा या धार्मिक मेलों के मामले में ऐसी कालावधियों तक निर्बन्धित भी किया जा सकेगा।
103. तीर्थयात्री यानों पर कर - ऐसी कालावधि के दौरान यानों को खड़ा करने के लिए, बसों, कारों, टैक्सियों इत्यादि के लिए विभिन्न दरों पर कर उद्गृहित किया जा सकेगा।
104. संग्रहण के लिए प्रक्रिया - पंचायत कर को या तो जाँंच चौकी के माध्यम से संगृहित कर सकेगी या कर के ऐसे संग्रहण के लिए ठेका लोक नीलाम के जरिये आवंटित कर सकेगी।
[टिप्पणीः- पंचायत द्वारा तीर्थ यात्री कर लगाने से पूर्व राज्य सरकार की मंजूरी लेना अनिवार्य है जबकि अन्य कर पंचायत अपने स्तर पर लगा सकती है ।]
फीसों और करों की वसूली
105. शोध्यों के लिए बिल - (1) पंचायत को संदेय किसी भी कर फीस या अन्य शोध्यों की रकम के लिए, एक माँग पर्ची प्रपत्र 5 में तैयार की जायेगी और उसी दायित्वाधीन व्यक्ति को भेजी जायेगी।
(2) ऐसे प्रत्येक बिल में शोध्य रकम, उसकी प्रकृति वह व्यक्ति जिससे वह शोध्य है और वह कालावधि जिसके लिए वह शोध्य हैं, विनिर्दिष्ट होगी।
106. माँग का नोटिस - यदि इस प्रकार शोध्य राशि, उसके लिए बिल के प्रस्तुत किये जान के पन्द्रह दिन के भीतर-भीतर पंचायत कार्यालय में संदत्त न की जाये, तो पंचायत ऐसे व्यक्ति पर, जिसको कि ऐसा बिल प्रस्तुत किया गया है, प्रपत्र संख्या 13 में माँग का एक नोटिस तामील करवा सकेगी।
107. कुर्की और विक्रय का वारण्ट - (1) यदि वह व्यक्ति, जिस पर माँग का कोई नोटिस तामील किया गया है माँग के ऐसे नोटिस की तामील के पन्द्रह दिन के भीतर-भीतर नोटिस में मागी गयी राशि संदत्त नहीं करें या पंचायत के समाधान के लिए वह कारण दर्षित नहंी करे कि उसे क्यों नहीं वसूल किया जाना चाहिए तो वसूली के सभी खर्चो के साथ ऐसी राशि, व्यतिक्रमी की जंगम सम्पत्ति की कुर्की और विक्रय के लिए पंचायत द्वारा प्रपत्र 14 में जारी किये गये किसी वारण्ट के जरिये वसूल की जा सकेगी जो सचिव या अन्य लिपिक को संबोधित किया जायेगा।
(3) जहाँ कुर्की और विक्रय के लिए प्रस्तावित सम्पत्ति, कुर्की और विक्रय का वारण्ट जारी करने वाली पंचायत की अधिकारिता के बाहर हो, वहाँ ऐसा वारण्ट उस पंचायत के सरपंच को संबोधित किया जायेगा जिसकी अधिकारिता में ऐसी सम्पत्ति तत्समय है, और जहाँं वह ऐसे क्षेत्र में हो जिसके लिए कोई भी पंचायत नही है वहां वह अधिकारिता रखने वाले तहसीलदार को संबोधित किया जायेगा।
(4) उप-नियम (3) के अधीन वारण्ट प्राप्त करने वाली पंचायत का सरपंच या तहसीलदार उसे किसी भी अधीनस्थ अधिकारी को पृष्ठांकित कर सकेगा।
(5) इस नियम के अधीन जारी किया गया कोई वारण्ट व्यतिक्रमी की इतनी ही, जंगम सम्पत्ति की कुर्की और विक्रय के लिए देगा जो पंचायत की मॉंग और कुर्की तथा विक्रय के खर्चो की पूर्ति के लिए पर्याप्त हो।
108. कुर्की से छूट - निम्नलिखित सम्पत्ति नियम 107 के अधीन कुर्की और विक्रय के दायित्वाधीन नहीं होगी, अर्थातः-
(क) व्यतिक्रमी, उसकी पत्नी और बच्चों के आवश्यकपहनने के वस्त्र और बिस्तर,
(ख) औजार और कारीगर,
(ग) जहाँ व्यतिक्रमी कोई कृषक हो वहॉं उसके ख्ेाती के उपकरण, बीज, आगामी आठ मास तक के लिए उसके परिवार के लिए खाने-पीने की वस्तुएँं और उसकी गाय का बछड़ा, बछिया और अष्विका,
(घ) ऐसे आभूषण जिन्हें किसी स्त्री द्वारा छोडना रीति-रिवाज द्वारा प्रतिषिद्ध हो,
(ड़) श्रमिकों और घरेलू सेवकों की मजदूरियां चाहे वे धन के रूप में संदेय हो या जिन्स के रूप में,
(च) निर्वाह भत्ते के 50 प्रतिशतसीमा तक का वेतन!
स्पष्टीकरण-खण्ड (ड़) और (च) में ‘‘वेतन’’ से अभिप्रेत हैं किसी व्यक्ति द्वारा अपने नियोजन से छुट्टी पर या ड्यूटी पर प्राप्त की गयी कुल मासिक परिलब्धियां जिसमें राज्य या केन्द्र सरकार के किसी भी कानूनी आदेश के अधीन कुर्की से छूट पर पा्रप्त घोषित किया गया कोई भी भत्ता सम्मिलित नहीं है।
109. कुर्की के लिए प्रवेश - किसी भी अधिकारी के लिए जिसे नियम 107 के अधीन कुर्की और विक्रय का कोई वारण्ट सम्बोधित या पृष्ठांकित किया गया है, वारण्ट में निर्दिष्ट कुर्की करने के लिए सूर्योंदय और सूर्यास्त के बीच किसी भवन के किसी भी बाहरी या भीतरी दरवाजे को तोड़कर खोलना विधिपूर्ण होगा यदि उसके पास यह विश्वास करने के युक्तियुक्त आधार हो कि ऐसे भवन में ऐसी सम्पति है जो वारण्ट अधीन अभियोजन है और यदि वह अपने प्राधिकार और प्रयोजन को अधिसूचित करने तथा प्रवेश के लिए सम्यक रूप से माँग करने के पश्चात अथवा प्रवेश नहीं कर सकता हो:
परंतु ऐसा अधिकारी किसी महिला के लिए नियत किसी भी खण्ड में तब तक प्रवेश नहीं करेगा या उसके दरवाजे को तोडकर नहीं खोलेगा जहां तक कि उसने अपने आशय की युक्तियुक्त सूचना न दे दी हो और ऐसी महिला को हटने का अवसर न दे दिया हो।
110. कुर्की - (1) नियम 107 के उप-नियम (5) में अंतर्विष्ट उपबन्धों के अध्यधीन और नियम 108 में विनिर्दिष्ट अपवादों के भी अध्यधीन रखते हुए, वह अधिकारी जिसे कुर्की और विक्रय का वारण्ट सम्बोधित या पृष्ठांकित किया गया है जहाँ कहीं भी वह पायी जाये, कुर्क करने के लिए सक्षम होगा।
(2) ऐसा अधिकारी, सम्पति को कुर्क करने पर उसे हटाने या उसके समाधान के लिए पर्याप्त प्रतिभूति देने पर किसी भी अन्य व्यक्ति को संभलाने से पूर्व उस सम्पति की एक तालिका तत्काल बनायेगा और इस उप-नियम के अधीन तैयार की गयी प्रत्येक तालिका उस परिक्षेत्र के दो प्रतिष्ठित व्यक्तियों द्वारा अनुप्रमाणित की जायेगी जिनकी उपस्थिति में वह तैयार की गयी थी।
111. क्षयशील सम्पति का विक्रय - जब कुर्क की गई सम्पति शीघ्रतया और प्रकृत्या क्षयशील हो तो जब तक माँग की रकम निविदत न की जाये, उसका तत्काल विक्रय किया जा सकेगा और विक्रय के आगम जमा की जा सकेगी।
112. कुर्की के प्रति आक्षेप - (1) कुर्की के अधीन की सम्पति के लिए कोई दावा करने वाला कोई व्यक्ति उसी तारीख के पन्द्रह दिन के भीतर - भीतर ऐसी कुर्की के विरूद्ध आक्षेप फाईल कर सकेगा।
(2) ऐसे आक्षेप के संबंध में वारण्ट जारी करने वाली पंचायत के सरपंच द्वारा या यदि ऐसा वारण्ट नियम 107 के उप - नियम (3) के अधीन किसी अन्य पंचायत के सरपंच को या, यथास्थिति, अधिकारिता रखने वाले तहसीलदार को संबोधित किया गया हो तो ऐसे सरपंच या तहसीलदार द्वारा अन्वेषण और निर्वर्तन किया जायेगा।
(3) यदि आक्षेप अकर दिया जाये तो कुर्क की गयी सम्पति कुर्की से मुक्त कर दी जायेगी या यदि नियम 111 के अधीन उसका विक्रय कर दिया गया हो तो उसके विक्रय आगम आक्षेपकर्ता को संदाय किये जायेंगे।
(4) आक्षेप का अंतिम निपटारा होने तक कुर्क की गयी सम्पति के विक्रय का आदेश नहीं दिया गया हो तो वह स्थगित हो जायेगा।
(5) उप-नियम (4) में की कोई भी बात नियम 111 के अधीन किये गये किसी विक्रय से संबंधित नहीं होगी या उसे किसी भी प्रकार प्रभावित नहीं करेगी।
113. कुर्क की गयी सम्पति का विक्रय - (1) निम्नलिखित मामलों में, अर्थात्ः-
(1) जब नियम 112 के अधीन कुर्की के प्रति कोई आक्षेप फाईल नहीं किया हो या यदि फाईल किया गया हो, तो अनुज्ञात कर दिया गया हो और
(2) जब व्यतिक्रमी अपनी सम्पति की कुर्की के पश्चात ऐसी कुर्की से पन्द्रह दिन के भीतर - भीतर मॉग की रकम संदत करने में विफल रहा हो ओर कुर्क की गयी सम्पति का नियम 111 के अधीन विक्रय नहीं किया गया हो तब ऐसी सम्पति का विक्रय उसके विक्रय के लिए नियत की जाने वाली किसी तारीख पर लोक नीलाम द्वारा किये जाने का आदेश दिया जायेगा जो कुर्की की तारीख के पश्चात के बीसवें दिन के पूर्व की नहीं होगी।
(2) लोक नीलाम द्वारा ऐसे विक्रय का नोटिस उस स्थान के आस-पास और उस गांव या कस्बे में जहाँ सम्पति का विक्रय तत्समय किया जाना हो, किसी केन्द्रीय स्थान पर डोंडी पिटवा कर उद्घोषित किया जायेगाः बशर्ते नोटिस के जारी होने की तारीख से उस तारीख तक जिसको नीलाम प्रारम्भ किया जाये, कम से कम पन्द्रह दिन का समय व्यतीत हो चुका हो।
(3) ऐसे नीलाम में बोली लगायी जायेगी और सबसे ऊँची बोली लगाने वाले व्यक्ति को इस प्रकार नीलाम की गयी सम्पति का क्रेता घोषित किया जायेगा।
(4) बोली की सम्पूर्ण रकम क्रेता द्वारा उस स्थान पर ही संदत की जायेगी।
(5) नियम 107 के अधीन कुर्की और विक्रय का वारण्ट जारी करने वाली पंचायत का सरपंच या कोई पंच, सरपंच या कोई भी अधिकारी जिसे वह संबोधित या पृष्ठांकित किया जाये और कुर्क की गयी सम्पति के विक्रय में लगा या नियोजन कोई भी अधिकारी उसके इस नियम के अधीन उसके किसी भी विक्रय में भाग नहीं लेगा।
114. विक्रय आगमों का विनियोजन - (1) नियम 111 या नियम 113 के अधीन किसी भी सम्पति के विक्रय के आगमों में से इसमें आगे उल्लिखित मदों का पूर्वोक्त क्रम में संदाय किया जायेगा।
(1) ऐसे विक्रय में उपगत खर्चो और उनके लेखे के शोध्य, यदि कोई हो
(2) किन्हीं भी कुर्क किये गये पशुओं का अनुरक्षण किसी पंचायत कांजी हाउस में उनके अनुरक्षण की दरों पर करने के खर्वे को सम्मिलित करते हुए कुर्की का खर्चा और
(3) पंचायत की माँग जिसको वसूली के लिए कुर्की और विक्रय का आदेश दिया गया था।
(2) उप-नियम (1) के खण्ड (3) में निर्दिष्ट संदाय कर दिये जाने और पंचायत के लेखे में जमा कर दिये जाने पर उसके लिए एक रसीद व्यतिक्रमी को दी जायेगी।
अध्याय 8
कांजी हाउस
115. कांजी हाउस कीपर की नियुक्ति और कर्तव्य - (1) कांजी हाउस कीपर पंचायत द्वारा पृथक से नियुक्त किया जा सकेगा या उसके कर्तव्य खुले नीलाम के माध्यम से नियुक्त किसी ठेकेदार को साैंपे जा सकेंगे। कांजी हाउस कीपर का यह कर्तव्य होगा कि वहः (क) कांजी हाउसों से संबंध रखने वाले निम्नलिखित अभिलेख रखेगाः-
(1) प्रपत्र संख्या 15 में कांजी हाउस रजिस्टर
(2) प्रपत्र संख्या 16 परिबद्व पशुओं की विशिष्टियां दर्शित करने वाली पास बुक
(3) प्रपत्र संख्या 17 और 18 में परिबद्व पशुओं का परिदान दर्शित करने वाली पास बुक और
(4) प्रपत्र संख्या 19 में पशुओं के स्वामी द्वारा संदत किये जाने वाले प्रभारी और विक्रय आगमों का लेखा
(ख) ऐसे विवरण तैयार करना जो पंचायत द्वारा समय समय पर निर्देश किये जायें, और
(ग) परिबद्व पशुओं को सुरक्षित रखना और गर्मी, सर्दी ओर वर्षा से बचाने की और उन्हे खिलाने की भी व्यवस्था करना ।
(2) कांजी हाउस से और परिबद्व पशुओं को खिलाने-पिलाने से संबंधित सभी व्यय पंचायत निधि पर प्रभरित किये जायेंगे और उनसे होने वाली सभी आय उस निधि में जमा की जायेंगी।
116. पशुओं को अभिगृहित कर रखने वाले व्यक्ति - निम्नलिखित व्यक्तियों में से कोई भी किसी भी पशु का े अभिगृहीत कर या करवा सकेगा और उस पशु का े इस प्रयोजन के लिए स्थापित कांजी हाउस में चौबीस घण्टे के भीतर-भीतर ला या लिवा सकेगा।
(क) किसी भी ऐसी भूमिका का कृषक या अधिभोगी जिस पर उस पशु नेे अतिचार किया है और उसमें किसी भी फसल या उपज को नुकसान पहुंचाया है।
(ख) वह व्यक्ति जिसने किसी भी ऐसी भूमि पर जिस पर उस पशु नेे अतिचार किवा है और नुकसान पहुचाया हैं फसल या उपज को खेती के लिए अग्रिम खर्चा दिया है।
(ग) ऐसी फसल या उपज या उसके किसी भी भाग या उस भूमि का, जिस पर पशुओं ने अतिचार किया है या नुकसान पहुंचाया है, खरीददार या बंधकदार।
(घ) ऐसी फसल या उपज या उसके किसी भी भाग या उस भूमि का क्रेता जिस पर उस पशु नेे अतिचार किया है और नुकसान पहुंचाया है।
(ड़) सार्वजनिक सड़कों, खेल के मैदानों, बागानों, नहरों, जल-निकास संकर्मो, तटबंधों और इसी प्रकार के स्थानों का प्रभारी व्यक्ति या कोई भी लोक सेवक जो पशुओं को ऐसी सड़कों, मैदानों, बागानों, नहरों, तटबंधों और इसी प्रकार के स्थानों या ऐसी सड़कों,नहरों, जल विकास संकर्मो तटबंधों के पार्ष्वो या ढ़लानों को नुकसान पहुंचाते हुए या उन पर भटकते हुए पाये।
(च) खण्ड (क) से (घ) में उल्लिखित व्यक्तियों को और ऐसी भूमि की निगरानी के लिए नियुक्त कोई व्यक्ति, और (छ) चौकीदार और कोई भी लोक सेवक जो पशुओं को भटकते पाये।
117. चराई आदि और जुर्मानों की दरों का संप्रदर्शित किया जाना - जुर्मानों और खिलाने-पिलाने के प्रभारों की दरों की एक सूची कांजी हाउस पर या उसके निकट किसी सहजदृष्य स्थान पर लगायी जायेगी।
118. रजिस्टर में पशुओं की प्रविष्टि - जब पशु किसी कांजी हाउस में लाये जावें तो कांजी हाउस कीपर प्रपत्र 15 में एक रजिस्टर में प्रविष्टि करेगाः-
(क) पशुओं की संख्या और विवरण,
(ख) वह दिन और समय जिसको और जिस पर वे लाये गये थे,
(ग) अभिग्रहण करने वाले का नाम और निवास,
(घ) यदि ज्ञात हो तो पशुओं के स्वामी का नाम और निवास, और
(ड़) पशुओं की पहचान के चिह्न-रंग, सींग पूंछ बाल आदि।
119. पशुओं के लिए रसीद का दिया जाना - (1) इस प्रकार लाये गये पशुओं को परिबद्ध करने के पश्चात् कंाजी हाउस कीपर दो प्रतियों में एक रसीद तैयार करेगा और अभिग्रहण करने वाले या उसके अभिकर्ता को ऐसी रसीद की एक प्रति देगा और उसकी पावती के प्रमाण के रूप में रसीद बुक के प्रतिपर्ण पर उसके हस्ताक्षर या, यथास्थिति अंगूठे का निषान, अभिप्राप्त करेगा। प्रत्येक पशु का विवरण इस प्रयोजन के लिए रखे गये रजिस्टर में लिखा जायेगा।
(2) यदि पशुओं के स्वामी का नाम ज्ञात हो तो कांजी हाउस कीपर सुविधाजनक हा तो उसे सूचित करने की व्यवस्था करेगा।
120. वह समय जिसके दौरान पशु परिबद्व किये जा सकेंगे - पशु दिन और रात्रि के 10 बजे तक किसी भी समय इस शर्ते के अध्यधीन रखते हुए परिबद्ध किये जा सकेंगे कि पशु का अभिगृहिती उन्हें परिबद्ध करने पर कांजी हाउस कीपर से अपनी उपस्थिति में ऐसे पशु केी एक रसीद अभिप्राप्त करेगा।
121. पशुओं को खिलाने और जल पिलाने के समय का पंचायत द्वारा नियत किया जाना - पंचायत पशुओं को खिलाने और जल पिलाने का समय नियत करेगी और जिन पशुओं को न तो खिलाया गया है न ही जल पिलाया गया है उनके मामले में जुर्माना ही वसूलीय होगा।
122. पशुओं को जल पिलाने की व्यवस्था - पंचायत परिबद्ध को जल पिलाने के लिए पात्रों की समुचित व्यवस्था करेगी।
स्पष्टीकरण-यह व्यवस्था उस व्यवस्था के अतिरिक्त होगी जो पंचायत नियत किये गये समय पर पशुओं को जल पिलाने हेतु ले जाने के लिए करे।
123. स्वामी को पशु का परिदान - यदि पशु का स्वामी या उसका अभिकर्ता 3 दिन के भीतर-भीतर उपस्थित हो जाये और पशु केे लिए दावा करे, तो कांजी हाउस कीपर ऐसे पशुओं के संबंध में पंचायत द्वारा नियत किये गये जुर्मानों और प्रभारी के संदाय पर, उस पशु का े उसे परिदत्त कर देगा।
(2) पशु का स्वामी या उसका अभिकर्ता उस पशु का े वापस लेने पर रसीद के प्रमाण स्वरूप इस प्रयोजन के लिए विहित रजिस्टर में हस्ताक्षर करेगा।
124. सदोष अभिग्रहण के आधार पर पशुओं की नियुक्ति - यदि स्वामी या उसका अभिकर्ता उपस्थित हो और उक्त जुर्माना और व्यय संदत्त करने से इस आधार पर इन्कार करे कि अभिग्रहण अवैध था और स्वामी परिवाद प्रस्तुत करने वाला है तो जुर्माने और उस पशु केे संबंध में उपगत प्रभार यदि कोई हो जमा कराने पर पशु उसे परिदत्त कर दिया जायेगा।
125. जुर्माने आदि संदत्त करने में विफल होने पर विक्रय - यदि स्वामी या उसका अभिकर्ता उपस्थित हो और उक्त जुर्माने तौर प्रभार संदत्त या जमा करने से इन्कार करे या उसमें विफल रहे तो पंचायत द्वारा पांच दिन का नोटिस देने के पश्चात् पशु का लोक नीलाम द्वारा विक्रय किया जा सकेगा। देय जुर्माने और खिलाने तथा जल पिलाने के व्ययों के साथ-साथ विक्रय के व्यय यदि कोई हों, विक्रय के आगमों में से काट लिए जायेंगे। शेश पशुऔर विक्रय धन का अतिशेष यदि कोई हो, स्वामी या उसके अभिकर्ता को निम्नलिखित दर्शित करने वाले लेखे के साथ परिदत्त कर दिया जायेगाः-
(i ) अभिगृहित पशुओं की संख्या,
(ii ) वह समय जिसके दौरान वे परिबद्ध किये गये हैं,
(iii ) उपगत जुर्मानों और प्रभारौं की रकम,
(iv) वह रीति जिससे आगामों का व्ययन किया गया है।
[टिप्पणी - स्वामी या उसका अभिकर्ता उसे परिदत्त किये गये पशु केे लिए और ऐसे लेखे के अनुसार उसे संदत्त किये गये क्रय धन के अतिशेष के लिए रसीद देगा। यदि पशु का स्वामी या उसका अभिकर्ता जुर्माने या पशु केे संबंध में उपगत संदत्त करने या जमा कराने से इन्कार करें, तो उससे यदि संभव हो, एक लिखित रिपोर्ट अभिप्राप्त की जाये]
126. जुर्माने आदि की वसूली के लिए रसीद - यदि पशु का े छोड़ा जाये तो पशु केे स्वामी या उसके अभिकर्ता को प्रपत्र संख्या 17 में रसीद की दो प्रतियों में से एक दी जायेगी और उसके द्वारा जुर्मानों या पशुओं पर उपगत प्रभारों, यदि कोई हो, के संदत्त किये जाने के प्रमाणस्वरूप उसके हस्ताक्षर रजिस्टर में रसीद के पीछे अभिप्राप्त किये जावेंगे। रसीद की रकम की पिछली रसीदों की रकम में जोड़ने के पष्चात़् योग का प्राप्त हुये कुल धन के स्थान में लिखा जावेगा। यह योग प्रगामी रूप में बढ़ेगा जो केवल तब ही लिखा जायेगा जब रसीद के दोनों पर्ण तैयार कर दिये जायें।
127. क्रेता को रसीद का दिया जाना - यदि पशु नेीलाम किये जायें तो क्र्रेता को प्रपत्र संख्या 19 में पंचायत के सरपंच द्वारा सम्यक् रूप से हस्ताक्षरित रसीद दी जायेगी।
128. अदावाकृत पशु - यदि पशुओं के लिए, उनके परिबद्ध किये जाने की तारीख से तीन दिन के भीतर-भीतर दावा न किया जाये तो कांजी हाउस कीपर रजिस्टर में प्रपत्र संख्या 15 में इस तथ्य की प्रविष्टि करेगा और उसकी रिपोर्ट पंचायत को करेगा।
129. अदावाकृत पशुओं के संबंध में कांजी हाउस की रिपोर्ट - जो रिपोर्ट कांजी हाउस कीपर नियम 128 के अनुसार करेगा उसमें वह खिलाने के व्ययों और अन्य व्यय यदि कोई हो, ब्यौरो की प्रविष्टि करेगा।
130. 3 दिन के भीतर-भीतर न छोडे़ गये पशुओं का निर्वर्तन - 3 दिन के भीतर-भीतर न छोड़े गये पशुओं के बारे में कोई रिपोर्ट प्राप्त होने पर उसकी पत्रावली खोलने के पश्चात् निम्नलिखित कार्यवाही की जायेगी,
(क) पंचायत इस आश य का एक नोटिस देगी की किसी भी व्यक्ति को जो संबंधित पशुओं के नीलामी के प्रति आक्षेप रखता हो, उसे सही साबित करना चाहिए, और कोई भी आक्षेप ऐसे नोटिस में विनिर्दिष्ट कालाविधि (जो 30 दिन से कम की नहीं होगी) की समाप्ति के पश्चात् ग्रहण नहीं किया जायेगा। नोटिस में निम्नलिखित विषिष्टियां अवष्य लिखी जायेंः-
(1) पशुओं की संख्या और वर्णन,
(2) वे स्थान जहाँ वे अभिगृहित किये गये थे, और
(3) वे स्थान जहाँ वे परिबद्व हैं। टिप्पणी
ऐसे नोटिस को अभिग्रहण के स्थान के समीपतम गंाव में प्रकाशित किया जायेगा।
(़ख) नोटिस को प्रकाशित करने पर पंचायत साथ ही और सश र्त ऐसे पशुओं को नीलाम करेगी और वसूल किये गये नीलाम-धन को निलबंन खाते में जमा करा दिया जायेगा। पशुओं के नीलाम की शर्ते निम्नलिखित होंगी-
(1) यदि कोई आक्षेप फाइल नहीं किया जाये तो 30 दिन की कालावधि के भीतर-भीतर और यदि फाईल किया जाये तो ऐसे आक्षेप का अंतिम विनिश्चय होने तक पशु का क्र्रेता पशुओं का स्वामित्व अंतिरत नहीं करेगा, और
(2) वह नीलाम धन और पशुओं को खिलाने के व्ययांे का संदाय किये जाने पर पंचायत को पशु लौटा भी देगा। पंरतु यदि पंचायत परिबö पशु का लोक नीलाम द्वारा विक्रय, बोली लगाने वालों के अभाव कें कारण या नीलाम विक्रय के पशु की पूरी कीमत प्राप्त न होने के कारण, करने में असमर्थ हो तो पंचायत पशु को पड़ोस की पंचायत में या पशु मेला प्रभारी को विक्रय के लिए भेज सकेगी और पश्चात् कथित व्यक्ति ऐसे पशु के संबंध में नीलाम विक्रय की कार्यवाहियां संचालित करेगा और विक्रय आगम विक्रय कार्यवाही के खर्चे काट कर पूर्वकथित को विप्रेषित कर देगा। टिप्पणी नीलाम तीन दिनों तक किया जायेगा किन्तु यदि नीलाम से पशुओं की पूरी कीमत पहले ही प्राप्त हो जाये तो तीन दिनों की ऐसी कोई भी कालावधि आवश्यकनहीं होगी।
़(ग) यदि नोटिस की कालावधि के दौरान किसी भी व्यक्ति द्वारा कोई भी आक्षेप फाइल किया जावे तो पंचायत उससे उन पशुओं का स्वामित्व साबित करने की अपेक्षा करेगी। पंचायत पशुओं को उस व्यक्ति को लौटाने का आदेश देगी जिसने आक्षेप फाईल किया है, यदि वह यह साबित कर दे कि पशु उसके स्वयं के हैं।
स्पष्टीकरण- कार्यवाहियों की कालावधि के दौरान यदि पंचायत को यह समाधान हो जाये कि पशु आक्षेप फाईल करने वाले व्यक्ति के है और आगे किसी कार्यवाही की आवष्यकता नहीं है तो पंचायत यह ध्यान में रखते हुए कि खिलाने और पानी पिलाने के व्यय अनावष्यक रूप से न बढ़ें, यदि वह उचित समझे, पर्याप्त प्रतिभूति पेश करने पर पशु ऐसे व्यक्ति को परिदत्त कर सकेंगी।
(घ) आक्षेप फाईल करने वाले व्यक्ति को, पशुओं के परिदान के मामले में जुर्माना और खिलाने के व्यय उससे लिये जायेंगे। पशुओं के कांजी हाउस में रखने की कालावधि का जुर्माना और व्यय कांजी हाउस के लेखे में जमा करा दिये जायेंगे और खिलाने के व्ययों में से पंचायत सशर्त नीलामी के दिन तक खिलाने के ऐसे पभार संदत करेगी जो वह ठीक समझे। अतिशेष यदि कोई हैं, पंचायत की निधियों में जमा करा दिया जायेगा।
(ड.) किसी व्यक्ति से आक्षेप प्राप्त नहीं होने पर या पशु उस व्यक्ति के जिसने आक्षेप फाईल किये हैं साबित न किये जा सकने के मामले में, पंचायत पशुओं के नीलाम का आदेश देते समय जुर्माना और पशुओं को खिलाने के व्यय कांजी हाउस के लेखे में जमा करायेगी और नीलाम धन का अतिशेष , यदि केाई हो, पंचायत की निधियों में जमा करा दिया जायेगा। परन्तु सशर्त नीलाम, पंचायत के विनिश्चय के विरूद्ध की गई अपील का अंतिम विनिश्चय होने के पश्चात् ही अंतिम होगा।
131. कांजी हाउस का निरीक्षण - कांजी हाउस ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के किसी भी अधिकारी द्वारा निरीक्षण करने के लिए खुला रहेगा। निरीक्षण के समय, निरीक्षण अधिकारी रजिस्टर में के स्तम्भों के योग की परीक्षा करेगा और देखेगा कि रसीद में आगामी योगों को सही रूप में लिखा गया है तथा वे पंचायत निधि में जमा रकमों से मेल खाते हैं। वे कांजी हाउस कीपर के पास रखी नकदी, यदि कोई हो, की परीक्षा व गणना भी करेंगे।
132. खिलाने और जल पिलाने के प्रभारों का मापमान और जुर्माने की दरें - खिलाने और जल पिलाने के प्रभारों का मापमान निम्नलिखित होगाः-
क्र.सं. पशु जुर्माने की दरें खिलाने के प्रभार (प्रतिदिन)
1. हाथी - 50/- रू 150/- रू
2. ऊंट - 50/- रू 50/-रू
3. घोड़ा - 50/- रू 50/-रू
4. भैंस - 25/- रू 25/-रू
5. गाय, बैल - 25/- रू 25/-रू
6. गधा - 25/- रू 25/-रू
7. बछ़डा - 10/- रू 10/-रू
8 . बकरी - 10/- रू 10/-रू
9 . भेड़ - 10/- रू 10/-रू
10 . अन्य - 10/- रू 10/-रू
[टिप्पणी(1) पशु में, जहाँ भी उसका उल्लेख हो, मादा पशु सम्मिलित होगा]
(2) स्वामियों द्वारा रात्रि में पशु को साशय चरने के लिए छोड़ने की स्थिति में जुर्माना दुगनी दर से प्रभारित किया जायेगा। ऐसे पशु को लाने वाले व्यक्ति को जुर्माने में से प्रोत्साहन के रूप में 20 रू दिये जा सकेंगे।
133. कांजी हाउस कीपर को अग्रिम धन दिया जाना - पंचायत कांजी हाउस कीपर को प्रबंध के प्रयोजनों के लिए 100रू तक की अग्रिम रकम देगी जो परिश द पशुओं को खिलाने और जल पिलाने की आवश्यकव्यवस्था पंचायत के पर्यवेक्षाधीन करेगा। प्रत्येक कांजी हाउस कीपर जो अग्रिम धन प्राप्त करता है, इस आश य की एक लिखित रसीद देगा कि धन उससे शोध्य है और वह उसका लेखा देगा। ऐसी रसीद पंचायत की सुरक्षित फाइल में रखी जायेगी। ऐसे किसी अग्रिम का कोई भी अतिशेष यदि वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर कांजी हाउस से शोध्य हो तो वह प्रतिवर्ष मार्च के मासिक लेखे में दिखाया जावेगा। अग्रिम जो कांजी हाउस कीपर को दिया जा सकेगा, पंचायत निधि का भाग होगा परन्तु कांजी हाउस की दैनिक आय कांजी हाउस कीपर द्वारा अगले दिन पंचायत में जमा करा दी जायेगी।
134. नीलामी में बोली लगाने के बारे में प्रतिषेध- पंचायत का कोई भी सदस्य या कर्मचारी नीलाम मं अपनी बोली नहीं लगायेगा।
135. पशु स्वामित्व किसी न्यायालय में विवादग्रस्त होने के मामले में उपबन्ध- उन मामलों में जहॉ परिबद्ध पशु का स्वामित्व किसी न्यायालय में या अन्यथा विवादग्रस्त है वहॉ न्यायालय यह निदेश दे सकेगा कि पशु को, उतनी कालावधि के लिए काजी हाउस में रखा जाये जो उस आदेश में विनिर्दिेष्ट हो, और पशु को, खिलाने आदि के मद्दे अनुमानित प्रभार संबंधित पक्ष द्वारा अग्रिम रूप से जमा कराये जायेंगेः
परन्तु यदि वह पक्ष इस नियम के अधीन पंचायत द्वारा नियत राशि अग्रिम रूप में संदत्त न करे या उक्त राशि संदत्त करने के लिए ऐसा कोई भी पक्ष न हो तो न्यायालय ऐसा समुचित आदेश पारित कर सकेगा जो वह ठीक समझे।
संकर्म, संविदाएं और क्रय
174. पंचायती राज संस्थाओं द्वारा वार्षिक कार्य योजना - (1) पंचायती राज संस्थान प्रत्येक वित्तीय वर्ष के प्रारंभ के पूर्व पूर्ववर्ती वर्ष में आवंटित निधियों के अपने हिस्से के 125 प्रतिशत के मूल्य की समतुल्य एक वार्षिक कार्य योजना, अधिमान्यतः, ग्राम सभा की वित्तीय वर्ष के अंतिम त्रिमास में आयोजित बैठक में तैयार करेगी। कोई भी कार्य नहीं लिया जा सकेगा, जब तक वह वार्षिक कार्य-योजना का भाग न हो।
(2) वार्षिक कार्य-योजना बनाते समय अपूर्ण संकर्मों को पूरा करने को, नवीन कार्य हाथ में लेने की तुलना में, प्राथमिकता दी जायेगी। कोई भी ऐसा कार्य नहीं लिया जायेगा जो दो वित्तीय वर्षों के भीतर- भीतर पूरा नहीं किया जा सकता हो।
(3) संकर्मों की योजना तैयार करते समय गांव के कमजोर तबके के हितों के संरक्षण का ध्यान रखा जायेगा और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं तथा ग्राम-समाज के अन्य कमजोर वर्गों को लाभ पहुंचाने वाले संकर्मों को प्राथमिकता दी जायेगी।
(4) केवल वे ही संकर्म लिये जा सकेंगे जिनका आकार, लागत तथा प्रकृति ऐसी है कि वे स्थानीय स्तर पर कार्यान्वित किये जा सकते हों और जो श्रम सघन तथा लागत प्रभावी हों और उच्चस्तरीय तकनीकी आदाएं अन्तर्वलित नहीं करते हों।
(5) लिये जाने वाले संकर्म चलने योग्य प्रकृति के होने चाहिए और समुचित तकनीकी स्तरमानों तथा विनिर्देशों की पूर्ति करने वाले होने चाहिए।
175. प्राक्लन और दरों की अनुसूची - (1) संबंधित पंचायती राज संस्था संकर्मों की योजना, डिजाइन या विनिर्देश और उनके निष्पादन में संभाव्यतः उपगत होने वाली लागत का प्राक्कलन अर्हता प्राप्त ओवरसीयर या अभियन्ता के जरिये या किसी भी अन्य अभिकरण के जरिये तैयार करायेगी।
(2) पंचायती राज संस्था ऐसे प्राक्कलन जिला परिषद् / जि.गा.वि.अ. द्वारा समय-समय पर जारी किये गये निर्देशों में बताई गई दर सूची के आधार पर कर सकेंगे।
(3) प्राक्कलन नियम 176 के उप-नियम (2) में उल्लिखित अधिकारियों द्वारा तकनीकी रूप से अनुमोदित किये जायेंगे।
176. सकंर्मो (निर्माण कार्यों) की मंजूरी - (1) यदि इस प्रकार तैयार की गयी योजना, डिजाइन या विनिर्देश का प्राकलन जो राज्य सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक का नहीं हो, तो पंचायत अपनी व्ययनाधीन निधियों की उपलब्धता के अध्यधीन रहते हुए, संकर्म के निष्पादन को अपने संकल्प द्वारा मंजूर कर सकेगी।
(2) राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर विहित सक्षम अधिकारी द्वारा तकनीकी अनुमोदन किया जायेगा।
(3) पंचायती राज संस्थाओं की कार्य योजना तकनीकी संविक्षा को सुनकर बनाने के लिए जिला परिषद् जि.ग्रा.वि.अ.संकर्मो की उन मदों के मानक-ड़िजाईन और लागत प्राक्कलन तैयार और अनुमोदन कर सकेगा जो पंचायती राज
संस्थाओं द्वारा हाथ में लिये जायें।
(4) संकर्म पंचायती राज संस्थाओं द्वारा अनुमोदित लागत मानदण्ड़ों और समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा जारी
की गयी मंजूरियों के आधार पर निष्पादित किये जा सकेंगे।
[टिप्पणी - वित्त (व्यय-1) विभाग की सहमति आई.डी. सं. 1701 दिनांक 15-6-1998 के अनुसरण में पंचायतों के द्वारा व्यय की सीमा प्रत्येक मामले में रु. 1.00 लाख निर्धारित की जाती है। आदेश क्रमांक एफ. 95/ (19)/7 लेखा/नि. आय / 13 दिनांक 1-1-1999 द्वारा प्रसारित]
177. सकंर्मो (निर्माण कार्यों) का निष्पादन - (1) नियम 176 के उप-नियम (4) के अधीन मंजूर किये गये संकर्म के निष्पादन का उत्तरदायित्व, इस नियम के उपबंधों के अध्याधीन रहते हुए, मुख्य रूप से पंचायत/ पंचायत समिति का होगा।
(2) किसी भी संकर्म का निष्पादन तब तक प्रारंभ नहीं किया जायेगा जब तक -
(क) वह सम्यक रूप से मंजूर न किया गया हो,
(ख) उसके लिए आवश्यक निधियां उपलब्ध न हो या उपलब्ध न करवा दी गयी हो,
(ग) तकनीकी अनुमोदन नियम 176(2) अथवा 176(3) के अनुसार अभिप्राप्त न कर लिया गया हो।
(3) पंचायतों तथा पंचायत समिति द्वारा निष्पादित संकर्मो के कुर्सी-स्तर छत-स्तर तक के और पूर्ण होने पर स्थल निरीक्षणों क लिए पंचायत समिति का कनिष्ठ अभियन्ता संकर्मों के संनिर्माण और तकनीकी विनिर्देशों की गुणवत्ता सुनिश्चित कराने के लिए उत्तरदायी होगा। संकर्मो की मापों के ब्योरों की प्रविष्टि इस प्रयोजन के लिए रखी गई माप-पुस्तक में की जायेगी।
(4) पंचो/ सदस्यों की समिति को स्थल पर ऐसे संकर्मो के निष्पादन को पर्यवेक्षण सौंपा जा सकेगा।
(5) पंचायतों/ पंचायत समितियों के निरीक्षण के दौरान प्रत्येक मास, विकास अधिकारी स्थल पर 10 प्रतिशत संकर्मो का भौतिक सत्यापन करेगा और मुख्य कार्यपालक अधिकारी कम से कम 10 संकर्मो की जांच करेगा।
178. समापन का प्रमाणप्रत्र - (1) संबंधित पंचायती राज संस्था का यह कर्तव्य होगा कि वह समापन प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए संकर्म की समापन की रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर-भीतर करें।
(2) समापन प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए सक्षम तकनीकी अधिकारी एक मास के भीतर संकर्म का निरीक्षण करेगा और प्रमाण-पत्र जारी करेगा।
(3) समापन प्रमाण-पत्र पर सरपंच और कनिष्ठ अभियन्ता दोनों के द्वारा हस्ताक्षर किये जायेंगे।
179. सावधि प्रगति रिपोर्ट - (1) मासिक प्रगति रिपोर्ट संकर्म वार मंजूर रकम, मास के दौरान व्यय, संचयी व्ययों, भौतिक प्रगति, मजदूरी/सामग्री पर व्यय का प्रतिशत, अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/ महिला / भूमिविहीन श्रमिकों के नियोजन को उपदर्शित करते हुए तैयार की जावेगी।
(2) ऐसी रिपोर्ट अगले उच्चतर प्राधिकारी और जिला परिषद/ जि.ग्रा.वि.अ. को भेजी जायेगी।
181. संकर्मो का रजिस्टर - (1) प्रत्येक पंचायती राज संस्था उसके द्वारा अपने जिम्मे लिए गये प्रत्येक संकर्मों के लिए प्रपत्र 25 में संकर्मो का एक रजिस्टर रखेगी।
(2) प्रत्येक संकर्म के लिए पृथक फाईल रखी जायेगी, जिसमें संबंधित संकर्म मंजूरी, प्राक्कलन, योजना आदि की प्रति रखी जायेगी।
(3) प्रत्येक संकर्म के लिए प्राप्त सार्वजनिक अंशदानों के लिए भी एक पृथक रजिस्टर रखा जायेगा।
*[181. संविदा पर संकर्मो का निष्पादन - (1) पंचायती राज संस्था किसी संकर्म को संविदाकारों के माध्यम से भी निष्पादित कर सकेगी जब तक कि संविदाकार के माध्यम से ऐसे संकर्म का निष्पादन सम्बन्धित स्कीम के मार्गदर्शक सिंद्वान्तो द्वारा निबंधित न हो ।]
*[राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम 2012 संख्या एफ.(7) एम /नियम/ विधि/ पंरा/ 2012/ 930 दिनांक 02.0 5.2012 द्वारा नियम 181 प्रतिस्थापित किया गया]
(2) उप- नियम (1) में अन्तर्विष्ठ किसी बात के होते हुए भी पंचायती राज संस्था कर्मकारी को मस्टल रोल पर अभिनियोजिता कर किसी संकर्म का निष्पादन कर सकेगी
(3) पंचायती राज संस्था उपर्युक्त उप-नियम (2) के अधीन निष्पादित किये जाने संकर्माे के लिए संकर्म सामग्री के क्रय के लिए निविदा आमान्त्रित करने की सम्यक प्रकिया का अनुसरण करने के पश्चात संविदा के आधार पा सामग्री का उपापन कर सकेगी । ]
182. पंचायती राज संस्थाओं के द्वारा संविदाएं और उनकी ओर से विलेखो का निष्पादन - (1) किसी पंचायती राज संस्था द्वारा या उसकी और से की गयी समस्त संविदाएं ऐसी पंचायती राज संस्था के नाम से की गयी अभिव्यक्त की जायेगी।
(2) वे पंचायत की और से संरपच और सचिव द्वारा संयुक्त रूप से, पंचायत समिति की और से प्रधान और विकास अधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से, जिला परिषद की ओर से प्रमुख और मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से सत्यापित और हस्ताक्षरित की जायेगी।
*[182क. संकर्मों के लिए विस्तृत प्रक्रिया - संकर्मों की योजना, मंजूरी और निष्पादन में, प्रत्येक पंचायती राज संस्था और निष्पादन करने वाला कोई अन्य अधिकरण राज्य सरकार द्वारा जारी ग्रामीण कार्य निर्देशिका में यथा विनिर्दिष्ट प्रक्रिया और निर्देशों का पालन करेंगें ।]
क्रय
183. *[सामग्री ओर सेवाओं का उपापन] - (1) पचंायती राज संस्थाए संनिर्माण संकर्मों लिए अपेक्षित सीमेन्ट, चूना, पत्थर, ईंट, पट्टियों, बजरी, लकडी इत्यदि (या कोई भी अन्य वस्तुए या सेवाएं ) न्यूनतम कीमतों पर उपाप्त करेगी
**[(1क) सम्बन्धित पंचायती रात संस्था द्वारा सामग्री ओर सेवाओं के उपापन के लिए वर्षिक कार्य योजना को प्रत्येक वर्ष 31 जनवरी तक या ऐसी किसी अन्य तारीख तक जो राज्य सरकार द्वारा इस निमित विनिश्चित की जाये अन्तिम रूप दिया जायेगा ओर सम्बन्धित पंचायती राज संस्था के नोटिस बोर्ड पर ओर सम्बन्धित जिले की शासकीय वेबसाइट पर प्रदर्शित की जायेगी ।]
**[राज. पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2011 द्वारा जोड़ा गया, राजपत्र भाग 4(ग) दिनांक 16 .03 .2011 को प्रकाशित एवं प्रभावी]
(1ख) प्रेत्यक पंचायत समित अपनी अधिकारिता के भीतर किसी ग्राम पंचायत द्वारा उपाप्त की जाने वाली सामग्री ओर सेवाओ की दरों की मूल अनुसूची जिसें इसमें इसके पश्चात् द.मू.अ. वर्ष में कम से कम एक बार 15 फरवरी तक या किसी अन्य तारीख तक जो राज्य सरकार द्वारा विनिश्चित की जाये तैयार की जायेगी । द.मू.अ. को निम्नलिखित से मिलकर बनी समिति द्वारा अन्तिम रूप दिया जायेगा अर्थात
(1) खण्ड विकास अधिकारी - अध्यक्ष
(2) पंचायत समिति कार्यालय में कार्यालय सहायक अभियंता - सदस्य सचिव
(3)संबधित पंचायत समिति क्षेत्र के लोक निर्माण विभाग का सहायक अभियंता - सदस्य
(4) संबधित पंचायत समिति क्षेत्र क ेजल संसाधन विभाग का सहायक अभियंता - सदस्य
(5) पंचायत समिति का लेखाकार या कनिष्ठ लेखाकार - सदस्य
(6) जिला कलक्टर/ जिला कार्यक्रम समन्वयक द्वारा नामनिर्दिष्ट पंचायत समिति मुख्यालय पर कार्यरत राजपत्रित अधिकारी - सदस्य
टिप्पणी - सहायक अभियंता, पंचायत समिति का पद रिक्त होने की स्थिति में, खंड विकास अधिकारी पंचायत समिति के क्षेत्र में किसी अन्य विभाग में कार्यरत अन्य सहायक अभियंता को सहयोजित करेगा ण्
(1ग) उपनियम (1ख) के तहत गठित समिति द्वारा अंतिम रूप दिए गए बीएसआर का अनुमोदन जिला स्तरीय दर अंतिमीकरण समिति से प्राप्त किया जाएगाए जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं -
(i) जिला कलेक्टर - अध्यक्ष
(ii) मुख्य कार्यकारी अधिकारीए जिला परिषद - सदस्य
(iii) लोक निर्माण विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी - सदस्य
(iv) जल संसाधन विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी - सदस्य
(v) वन विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी - सदस्य
(vi) कार्यपालक अभियंताए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना - सदस्य
(vii) जिला मुख्यालय में कार्यरत उद्योग विभाग के वरिष्ठतम पदाधिकारी - सदस्य
(viii) कार्यकारी अभियंताए जिला परिषद के कार्यपालक अभियंता (इंजीनियर) - सदस्य सचिव
(2) सामग्री विनिदेशों के अनुसार अच्छी गुणवता की और यदि मानक मद है तो आई. एस. आई मार्क की होनी चाहिए।
(3) सामग्री किसी ठेकेदार या बिचौलिये के माध्यम से क्रय की जाने की बजाय सीधें ही विनिर्माता या थोक प्रदायकर्ता से क्रय की जावेगी।
(4) पंचायती राज संस्था वर्ष के दौरान अपेक्षित ऐसी सामग्री के लिए मांग का निर्धारण कर सकेगी और यदि कुल मूल्य 30,000 रूपये से अधिक हो तो खुली निविदाएं आमंत्रित कर सकेगी।
(5) छोटे भागो में क्रय किये जाने को परिवर्जित किया जायें।
ख्(6) निविदाकर्ता राजस्थान मूल्य वर्धित कर अधिनियमए 2003 (2003 का अधिनियम संख्या 4) के तहत पंजीकृत एक डीलर होना चाहिए। निविदाकर्ता को निविदा में अपनी पंजीकरण संख्या (टिन) का उल्लेख करना होगा और संबंधित निर्धारण अधिकारी द्वारा जारी कर निकासी प्रमाण पत्र की एक प्रति संलग्न करनी होगीए ऐसा न करने पर निविदा को अस्वीकार कर दिया जाएगा।,
*[184. **[निविदाओं द्वारा की जाने वाली खरीद] - (1) यदि खरीद की राशि 3000/- रुपये से कम है तो किसी भी निविदा की आवश्यकता नहीं होगी और यह एकल कोटेशन के आधार पर या जिला परिषद के केंद्रीय या राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित दर अनुबंध पर किया जा सकता है।
*[राज. पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2006 द्वारा नियम 184 प्रतिस्थापित, अधिसूचना संख्या एफ. 186(14) लेखा/ इनस 1 / 2648 दिनांक 07.06 .2006]
**[राज. पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2011 द्वारा अन्तःस्थापित, राजपत्र भाग 4(ग) दिनांक 16 .03 .2011 को प्रकाशित एवं प्रभावी]
(2) यदि खरीद की राशि 3000/- रुपये से अधिक है लेकिन 50000/- रुपये तक है तो ऐसी सामग्री में काम करने वाले कम से कम तीन आपूर्तिकर्ताओं से प्रतिस्पर्धी दरों को आमंत्रित करके,सीमित निविदा आधार पर किया जा सकता है।
(3) यदि खरीद की राशि 50,000/- रुपये से अधिक हैए तो खुली निविदाएं सीलबंद लिफाफे में आमंत्रित की जाएंगी।
[(4) ग्राम पंचायत सामग्री और सेवाओं की खरीद के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करेगीए अर्थात -
(क) सीमित या खुली निविदा के माध्यम से संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा प्राप्त की जाने वाली सामग्री और सेवाएं नियम 183 के उप.नियम (1ख) और (1ग) के प्रावधानों के तहत अंतिम रूप दी गई दरों की नवीनतम मूल अनुसूची से अधिक नहीं होंगी।
(ख) यदि सीमित या खुली निविदा के माध्यम से पंचायत स्तर पर आमंत्रित वस्तुओं की दरें नवीनतम मूल अनुसूची दरों से 10% तक अधिक है, तो संबंधित पंचायत ऐसे मामलों को अधिकतम एक सप्ताह की अवधि सीमा के भीतर ऐसे मामले की जांच नियम 183 के उप.नियम (1ख) के तहत गठित दर अंतिमकरण समिति द्वारा की जाएगी और ऐसी समिति का निर्णय अंतिम होगा ।
(ग) ऐसे मामलों में जहां पंचायत स्तर पर सीमित या खुली निविदा के माध्यम से आमंत्रित मदों की दर 10% से अधिक लेकिन 25% तक है, उन्हें नियम 183 के उप.नियम (1ख) के तहत गठित समिति अपनी टिप्पणियों के साथ एक सप्ताह की अधिकतम अवधि के भीतर जिला कलेक्टर को संदर्भित किया जाएगा। इस प्रकार प्राप्त संदर्भ की जांच नियम 183 के उप नियम (1 ग) के तहत गठित जिला स्तरीय दर अंतिमीकरण समिति द्वारा की जाएगी। समिति इसे संदर्भित ऐसे सभी मामलों की जांच करेगी और अधिकतम 10 दिनों की अवधि
के भीतर इसका फैसला करेगी।,
*[टिप्पणी - सीमित निविदा की अनुमति अधिकतम रूपये 50,000/- प्रत्येक मामले में रुपये 5,00,000/- की वार्षिक सीमा तक अनुज्ञेय। राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) नियम 2012 संख्या एफ.(7) एम /नियम/ विधि/ पंरा/ 2012/ 930 दिनांक 02.0 5.2012 द्वारा रुपये 2 ,00,000/- स्थान पर रुपये 5,00,000/- प्रतिस्थापित किया गया]
185. निविदाएं आमंत्रित करने का नोटिस - (1) मुहरबंद लिफाफे में खुली निविदाएं आमंत्रित करने का नोटिस निम्नलिखित को विनिर्दिष्ट करते हुए जारी किया जायेगा-
(क) अपेक्षित वस्तुए, मात्रा, गुणवत्ता के बारे में विनिर्देश तथा अनुमानित मूल्य और अन्य आवश्यक ब्योरे जैसे प्रत्येक मद के लिए अथवा ग्रुपों आदि में दरे उद्धरित की जायें।
(ख) संबंधित पंचायती राज संस्था के कार्यालय में निविदाएं प्रस्तुत करने की तारीख और समय।
(ग) निविदा के साथ जमा कराये जाने वाले प्राक्कलित मूल्य का 2 प्रतिशत अग्रिम धन।
(घ) निविदाएं खोलने की तारीख और समय।
(ड़) निविदा स्वीकृत करने या उसे उसके लिए कोई कारण बताये बिना अस्वीकृत करने के लिए सक्षम प्राधिकारी।
(2) ऐसे निविदा नोटिस की प्रति हिन्दी में संबंधित पंचायती राज संस्था के कार्यालय में तथा ऐसे अन्य स्थानों पर, जो उपयुक्त समझे जाए, चिपकायी जायेगी और प्रतिष्ठित फर्मो, व्यवहारियों और प्रदायकर्ताओं को भी प्रतियां भेजी जायेगी।
(3) जिले में व्यापक प्रसार संख्या वाले कम से कम एक समाचार पत्र को विज्ञापन भेजा जायेगा
(4) नोटिस की अवधि निम्नानुसार होगी -
(ए) यदि निविदा राशि रुपये 50,000/- से अधिक लेकिन रुपये 5,00,000/- तक हो तो 10 दिन,
(बी) यदि निविदा राशि रुपये 5,00,000/- से अधिक लेकिन रुपये 10 ,00,000/- तक हो तो 15 दिन,
(सी) ) यदि निविदा राशि रुपये 10 ,00,000/- से अधिक हो तो 30 दिन।
परन्तु अत्यावश्यक आवश्यकता की दशा में जिसे लिखित रूप में अभिलेखित किया जायेगा, क्रय समिति एवं विभाग स्तर पर समिति, खुली निविदा की सूचना की अवधि 30 दिन से घटाकर 20 दिन तथा 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर सकती है।
186. निविदाओं का खोला जाना - (1) निविदाए, नोटिस में विनिर्दिष्ट तारीख और और समय पर, न कि उसके पूर्व, संबंधित पंचायत राज संस्था के कार्यालय में ऐसे निविदाकारों अथवा उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति में, जो उस समय उपस्थित हो, क्रय समिति द्वारा खोली जायेगी। यह सत्यापित किया जायेगा कि मुहर अविकल हैं तथा अधिकारियों द्वारा प्रत्येक निविदा पर उसे खोले जाने की तारीख और समय का पृष्ठांकन उपस्थित निविदा पर हस्ताक्षर करके किया जायेगा।
*[परन्तु उपनियम (2) के खण्ड (क) के अधीन गठित क्रय समिति की बैठक ग्राम पंचायत अथवा पंचायत समिति कार्यालय में हो सकती है।]
*[राज. पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2011 द्वारा परन्तुक अन्तःस्थापित, राजपत्र भाग 4(ग) दिनांक 16 .03 .2011 को प्रकाशित एवं प्रभावी]
(2) क्रय समिति निम्नलिखित रूप में गठित की जायेगी-
(क) पंचायत स्तर -
(i) सरपंच (अध्यक्ष),
(ii उप.सरपंच,
(iii) सतर्कता समिति का अध्यक्ष,
(iv) सचिव,
*[(v) पंचायत के कनिष्ठ अभियंता,
(vi) पंचायत समिति के लेखाकार या कनिष्ठ लेखाकार]
*[एक ग्राम पंचायत ऐसी खरीद समिति के माध्यम से सामग्री और सेवाओं की खरीद करेगी। समिति की गणपूर्ति हेतु पंचायत समिति के कनिष्ठ अभियंता एवं लेखाकार अथवा कनिष्ठ लेखाकार, ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव की उपस्थिति अनिवार्य होगी।,
*[राज. पंचायती राज (संशोधन) नियम, 2011 द्वारा जोड़ा गया, राजपत्र भाग 4(ग) दिनांक 16 .03 .2011 को प्रकाशित एवं प्रभावी]
(ख) पंचायत समिति स्तर -
(i) प्रधान (अध्यक्ष),
(ii) विकास अधिकारी,
(iii) कनिष्ठ अभियंता,
(iv) पंचायत समिति के वरिष्ठतम लेखा अधिकारी
(ग) जिला परिषद स्तर -
(फर्नीचर, स्टेशनरी,स्कूल के सामान और कार्यालय की वस्तुओं की खरीद के लिए दर अनुबंध)।
(i) प्रमुख (अध्यक्ष),
(ii) मुख्य कार्यकारी अधिकारी,
(iii) जिला परिषद के लेखा अधिकारी/ सहायक लेखा अधिकारी या जिले के कोषाधिकारी,
(iv) कलेक्टर द्वारा नामित एक अधिकारी,
(v) जिलों के दो विकास अधिकारी
(3) सभी निविदाये, उनके सिवाय जो उन पर अभिलिखित कारणों से अस्वीकृत की गयी हैं, सारणीबद्ध और संवीक्षित की जावेगी और मद वार दरों का तुलनात्मक विवरण तैयार किया जायेगा।
187. निविदाओं की अस्वीकृति - जो निविदाये नियत तारीख और समय के पश्चात् प्राप्त हुयी हो या जो नियम 185 के अधीन जारी किये गये नोटिस की अपेक्षाओं को पूरा नहीं करती हो या जिनके साथ केाई अग्रिम धन नियत समय के भीतर जमा नहीं करवाया गया हो अन्यथा सहीं नहीं हो, वे आम तौर पर अस्वीकृत कर दी जावेगी।
188. निविदाओं की स्वीकृति - (1) सभी वे निविदाएं जो समिति द्वारा खोले जाने पर सहीं पायी जाये और नियम 187 के अधीन अस्वीकृत नहीं की जाये, संबंधित पंचायती राज संस्था द्वारा अग्रिम रूप से अनुमोदन किये जाने के लिए रखी जावें।
(2) निम्नतम निविदा आमतौर पर स्वीकृत कर ली जायेगी और जहाँं निम्नतम निविदा को अस्वीकृत करवा आवश्यक समझा जायें वहाँ इसके कारणों को लेखबद्ध किया जाये।
(3) जब निविदा एक से अधिक वस्तुओं के सम्बन्ध में हो जैसे लेखन-सामग्री या संनिर्माण सामग्री तो प्रत्येक वस्तु के लिए या तो पृथक्-पृथक् रूप से या सभी वस्तुओं के लिये संयुक्ततः या वस्तुओं के विनिर्दिष्ट ग्रुपों के लिए, जहाँं तक स्वीकृत निविदा की कुल राशि निम्नतम हो, उनकी तुलनात्मक कीमतों पर विचार किया जा सकता है, बशर्ते कि पंचायती राज संस्था निम्नतम निविदा का चयन करने का आशय उनमें से किसी भी रूप में निविदा नोटिस में स्पष्ट किया जाये।
(4) यदि निविदा पर सभी वस्तुओं के लिए या वस्तुओं के ग्रुपों के लिए संयुक्ततः विचार किया जाये तो सभी वस्तुओं के या यथास्थिति, प्रत्येक गु्रप में की सभी वस्तुओं के सम्बन्ध में संभाव्य अपेक्षाओं की लागत प्रत्येक निविदा में दी गयी दरों के निर्देश से संगणित की जायेगी और निम्नतम निविदा वह होगी जिसके अनुसार
